कैसे नादान है ???हम 24 घंटे बाहर की दुनिया को देखते रहते हैं हम अपने अन्तर में देखने का प्रयास नही करते। जबकि असली सुगन्ध तो हमारे अन्दर है हम कभी उसको पाने का प्रयत्न ही नहीं करते। परमात्मा को पाने का सर्वोत्तम उपाय अपने अंतर में निरंतर सिमरन के अभ्यास से ही सम्भव है।
सन्तजन फरमाते हैं कि 24 घंटे में एक बार ही थोड़ी देर के लिये हम अपने कानों को बंद करके शब्द धुन को सुने और ध्यान करते समय अपने अन्तर में देखने की कोशिश करो।
पहले आँखों से ही शुरु करो, क्योंकि यही सबसे महत्वपूर्ण इंद्री हैआंखे बंद करके परमेश्वर का ध्यान करे, जो हमें बाहर से जोड़े रखती है। फिर अपने भीतर में जो भी आवाज़ सुनाई पड़े, उसे सुनने की कोशिश करो। फिर ध्यान मग्न होकर खुश्बूओं को सूंघने की कोशिश भी करो। तब हमारे अन्दर चमत्कार हो उठेगा।हम परमेश्वर की, तरह तरह की सुगन्ध को अनुभव करेंगे।
पहले हम अनुभव करेंगे कि कुछ तो है फिर हमे अनुभव होगा कि बहुत कुछ है यहां। क्योंकि अपने भीतर ही सँगीत हैं और अपनी ही आवाज़ें हैं। भीतर के अपने ही रंग हैं, अपने ही स्वाद और सुगंध हैं। जिस दिन हमे अपने भीतर के रंग दिखाई देंगे, उस दिन बाहर की दुनिया के सब रंग फीके लगेंगे ।फिर हमारी इच्छाएँ समाप्त हो जायेगी। तब संतोष और तृप्ति का भंडार मिल जाएगा। फिर बाहर के सब संगीत तुम्हें शोरगुल लगेंगे। जिस दिन भीतर के प्रकाश को देख लेंगे, उस दिन बाहर भी सब प्रकाशित हो जाएगा। फिर हर इन्सान अति सुंदर नजर आने लगेगा। फिर हम अपने दिल की बात अपने परमेश्वर के साथ कर पाएंगे।इसके लिए हमें सुमिरन और ध्यान में अपने परमेश्वर से जुड़ना होगा। परमेश्वर से सच्चा प्रेम बढाना होगा।
जय जय श्री राधेकृष्ण जी।श्री हरि आपका कल्याण करें।🙏🏻🪷













