एक भरोसो एक बल, एक आस विश्वास।
एक राम घनश्याम हित, चातक तुलसीदास॥
तुलसीदास जी कहते हैं कि उनका एक ही सहारा, एक ही बल और एक ही विश्वास है — श्रीराम। जैसे चातक पक्षी केवल वर्षा की बूंद की प्रतीक्षा करता है, वैसे ही भक्त केवल प्रभु पर आश्रित रहता है अर्थात सच्ची भक्ति में पूर्ण समर्पण आवश्यक है..
जय सियाराम
रामजी आनंद हैं,सुख और शांति के सागर हैं। सुख, शांति और आनन्द को ही पाने के लिए हम दिन रात सोना चांदी जमीन धन दौलत इकट्ठा करने में लगे हुए है पर शांति और आनंद मिल नही रहा, शांति और आनन्द तो केबल और केबल राम में मिल सकता है राम नाम मे मिल सकता है, अतः स्थाई आनन्द और सुख शांति के लिए राम अपनाएँ, सुखों के धाम राम अपनाए, राम राम जय राम













