गुरु के तीन प्रकार के भक्त

पहला, जो गुरु को केवल संकट के समय याद करते हैं।
दुख आया, समस्या आई तो चरणों में; काम बन गया तो अपने रास्ते।

दूसरा, जो श्रद्धा रखते हैं, सेवा भी करते हैं, पर समझ अभी अधूरी होती है।
वे गुरु के शब्द सुनते हैं, मानते भी हैं, पर जीवन में उतारने में समय लगाते हैं।

तीसरा, जो स्वयं को ही समर्पित कर देते हैं।
वे केवल आशीर्वाद नहीं, मार्ग चाहते हैं।
वे केवल समाधान नहीं, परिवर्तन चाहते हैं।
ऐसे भक्त गुरु को बाहर नहीं, भीतर स्थापित कर लेते हैं।

सच कहें तो गुरु सबको एक समान दृष्टि से देखते हैं,
पर कौन कितना ग्रहण करता है  यही असली भेद है।

महादेव महादेव

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