शिव में सृष्टि का संगीत और शांति का समन्वय है।
शिव के मस्तक पर विराजित गंगा और भौहों के बीच की रौद्रता, बारिश के गर्जन में भी शांति बिखेरते हैं।
कैलाश पर्वत पर घनघोर बारिश हो रही थी। देवी पार्वती कुछ चिंतित थीं। उन्होंने भगवान शिव से कहा, “स्वामी, इतना गर्जन और चमक! यह तो भयावह है।” शिव मुस्कुराते हुए बोले, “पार्वती, यह सृष्टि का संगीत है। बारिश की हर बूंद, बादलों की हर गर्जना का अपना महत्व है। जैसे हमारी जटाओं में गंगा का प्रवाह शांत है, वैसे ही हमारी आत्मा में शांति हमेशा होनी चाहिए, चाहे बाहर कितना भी तूफान हो।” यह सुनकर देवी पार्वती मुस्कुराई और कहा, “आपकी बातों में सच्ची शांति है।” शिव ने उनकी ओर देख कर कहा, “जब हमारे भीतर शांति हो, तब हम सृष्टि के हर बदलाव को साक्षी भाव से देख सकते हैं।” इस प्रकार, भगवान शिव ने अपनी दिव्य उपस्थिति से प्रकृति के हर रूप के प्रति भक्ति का अनुभव दिया।
हर हर महादेव 🙏🏻🙏🏻













