जो मुझसे नहीं होगा। वह ध्यान देकर विचार करे कि कठिन क्या नहीं है?
यह जो आप गप्प से रोटी खा जाते हो, मालूम है कितने प्रयास से बनती है ? किसान ने खेत में हल चलाया, भूमि तैयार की, बीज बोया, पानी दिया, खाद डाली, तब जाकर कोंपलें फूंटी, पौधे बने, तब पशु-पक्षियों से रक्षा की, बार बार खरपतवार निकाली, फिर खाद, फिर पानी, छः महीने बाद काटा, दाने निकाले, मंडी में बेचा।
आप ने खरीदा, टंकी में सहेजा, धोया, सुखाया, साफ किया, पिसवाया, तब भी आटा ही मिला, अभी रोटी बनी नहीं।
रोटी के लिए अभी और प्रयास चाहिए।
अभी कोई तवा बनाने में लगा है, कोई चिमटा, कोई चकला, कोई बेलन, कोई चूल्हा। कितनों ने मेहनत की। लोहार, बढ़ई, पत्थर के कारीगर, चूल्हा बनाने वाले, सबका प्रयास लगा।
अब आपको आटा गूंथना पड़ा, सब सामान, गैस सिलेंडर, चूल्हा, चकला, बेलन, चिमटा, तवा लाना पड़ा। आटा बेला, सिकाई की, गर्मी सही, पसीना बहाया, तब जा कर केवल रोटी ही मिली है, सब्ज़ी, दही, चटनी, अचार, पापड़ बनाने में जो श्रम लगा वो अलग।
और देखो, आज तो चपर-चपर बोलते हो, माँ ने कितने प्रयास से बोलना सिखाया है। जो दौड़ कर चलते हो, पिता ने कितना प्रयास किया, तब सीखा। चट से पढ़ते हो, चट से लिखते हो, यह सीख लेना कोई हंसी खेल था ? हज़ार बार मुर्गा बने हो, डाँटे डपटे गए हो, पिटे हो, उसका फल है।
बिना प्रयास तो कुछ हुआ ही नहीं।
तो घबराना कैसा? जैसे प्रयास करते करते बाकी सब सीखे हो, यों ही प्रयास करते करते नाम जप भी भीतर उतर जाएगा। “राम राम राम राम” करते करते कब नाम जपा से अजपा होकर, अनहद से भी पार कर, परमात्मा की गोद में बैठा देगा, पता भी नहीं चलेगा।
नाम जप अभ्यास करो, डरो मत, मंज़िल अपने से चली आएगी।
कृपया प्रतिपल देखें कि इस समय आपका मन कहाँ है और क्या कर रहा है ? यह श्वास रूपी हीरे में है या जगत के कचरे में ? साधक सावधान। नाम जपो नाम। कलयुग केवल नाम आधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा













