इस मंत्र का जप पुष्य नक्षत्र एवं शुक्रवार में अवश्य करें।
यह भगवती महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है प्रत्येक गृहस्थ को देवी महालक्ष्मी का सहस्राक्षरी लक्ष्मी स्तोत्र पढ़ना ही चाहिए क्योंकि गृहस्थ जीवन का आधार ही महालक्ष्मी हैं।
महालक्ष्मी पूजन विविध प्रकार से किए जा सकते हैं, लेकिन देवराज इंद्रकृत सहस्राक्षरी लक्ष्मी स्तोत्र अपने आप में अत्यंत ही प्रभावशाली तथा शीघ्र फलप्रदायक है।
इस अवसर पर आप चाहें तो महालक्ष्मी के किसी भी मंत्र का जाप कर सकते हैं जिससे आपको अनुकूलता प्राप्त होगी। यह स्तोत्र लक्ष्मीजी के यंत्र चित्र या मूर्ति के सामने करना चाहिए। पहले लघु पूजन करें। तदुपरांत स्तोत्र का पाठ करें।
महालक्ष्मी पूजन-
श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः गंधम समर्पयामि।
(इत्र कुंकुम चढायें)
श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः पुष्पम समर्पयामि।
(फूल चढायें )
श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः धूपम समर्पयामि।
(अगरबत्ती दिखायें)
श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः दीपम समर्पयामि।
(दीपक दिखायें )
श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः नैवेद्यम समर्पयामि।
(प्रसाद चढायें )
अब क्षमतानुसार ११, २१, ५१ या १०८ बार सहस्राक्षरी स्तोत्र मंत्र का पाठ करें !
विनियोग
(हाथ में जल लेकर)
ऊँ अस्य श्री सर्व महाविद्या महारात्रि गोपनीय मंत्र रहस्याति रहस्यमयी पराशक्ति श्री मदाद्या भगवती सिद्ध लक्ष्मी सहस्राक्षरी सहस्र रूपिणि महाविद्याया श्री इंद्र ऋषिं गायत्रयादि नाना छंदांसि नवकोटि शक्तिरूपा श्री मदाद्या भगवती सिद्ध लक्ष्मी देवता श्री मदाद्या भगवती सिद्ध लक्ष्मी प्रसादादखिलेष्टार्थ जपे पाठे विनियोगः।
(जल जमीन पर छोड़ दें )
अपने हाथ मे एक पुष्प रखें। एक पाठ पूरा हो जाने पर उसे देवी के चरणों मे चढ़ा दें और उनकी कृपा प्राप्ति की प्रार्थना करें।
सहस्राक्षरी लक्ष्मी स्तोत्र मंत्र-
ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं हसौं श्रीं ऐं ह्रीं क्लीं सौः सौः ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं जय जय महालक्ष्मी, जगदाद्ये,विजये सुरासुर त्रिभुवन निदाने दयांकुरे सर्व तेजो रूपिणी विरंचि संस्थिते, विधि वरदे सच्चिदानंदे विष्णु देहावृते महामोहिनी नित्य वरदान तत्परे महासुधाब्धि वासिनी महातेजो धारिणी सर्वाधारे सर्वकारण कारिणे अचिंत्य रूपे इंद्रादि सकल निर्जर सेविते सामगान गायन परिपूर्णोदय कारिणी विजये जयंति अपराजिते सर्व सुंदरि रक्तांशुके सूर्य कोटि संकाशे चंद्र कोटि सुशीतले अग्निकोटि दहनशीले यम कोटि वहनशीले ऊँकार नाद बिंदु रूपिणी निगमागम भाग्यदायिनी त्रिदश राज्य दायिनी सर्व स्त्री रत्न स्वरूपिणी दिव्य देहिनि निर्गुणे सगुणे सदसद रूप धारिणी सुर वरदे भक्त त्राण तत्परे बहु वरदे सहस्राक्षरे अयुताक्षरे सप्त कोटि लक्ष्मी रूपिणी अनेक लक्षलक्ष स्वरूपे अनंत कोटि ब्रहमाण्ड नायिके चतुर्विंशति मुनिजन संस्थिते चतुर्दश भुवन भाव विकारिणे गगन वाहिनी नाना मंत्र राज विराजिते सकल सुंदरी गण सेविते चरणारविंद्र महात्रिपुर सुंदरी कामेश दायिते करूणा रस कल्लोलिनी कल्पवृक्षादि स्थिते चिंतामणि द्वय मध्यावस्थिते मणिमंदिरे निवासिनी विष्णु वक्षस्थल कारिणे अजिते अमले अनुपम चरिते मुक्तिक्षेत्राधिष्ठायिनी प्रसीद प्रसीद सर्व मनोरथान पूरय पूरय सर्वारिष्टान छेदय छेदय सर्वग्रह पीडा ज्वराग्र भय विध्वंसय विध्वंसय सर्व त्रिभुवन जातं वशय वशय मोक्ष मार्गाणि दर्शय दर्शय ज्ञानमार्ग प्रकाशय प्रकाशय अज्ञान तमो नाशय नाशय धनधान्यादि वृद्धिं कुरूकुरू सर्व कल्याणानि कल्पय कल्पय माम रक्ष रक्ष सर्वापदभ्यो निस्तारय निस्तारय वज्र शरीरं साधय साधय ह्रीं सहस्राक्षरी सिद्ध लक्ष्मी महाविद्यायै नमः। ।। श्री महालक्ष्म्यै नमो नमः ।।
Chant this mantra in Pushya Nakshatra and Friday.
This is an important hymn of the grace of Bhagwati Mahalakshmi. Every householder should read the co -operative Lakshmi Stotra of Goddess Mahalakshmi because the basis of household life is Mahalakshmi.
Mahalakshmi Pujan can be done in a variety of ways, but Devraj Indrail Millennium Lakshmi Stotra is very effective and quickly fruitful in itself.
If you want on this occasion, you can chant any mantra of Mahalakshmi, which will give you compatibility. This hymn should be done in front of Lakshmiji’s instrument picture or idol. Perform short worship first. Thereafter recite the hymn.
Worshiping Mahalaxmi-
I offer Gandham to Sri Hri Sri Mahalakshmi. (Itra kumkum sadhayene)
I offer flowers to Sri Hri Sri Mahalakshmi. (Offer flowers)
I offer incense to Sri Hri Sri Mahalakshmi. (Agarbatti Show)
I offer the lamp to Sri Hri Sri Mahalakshmi. (Directory)
I offer the offering to Sri Hri Sri Mahalakshmi. (Offer offerings)
Now read 11, 21, 51 or 108 times according to the ability!
Appropriation (With water in hand)
ऊँ This Sri Sarva Mahavidya Maharatri is the secret mantra, the mysterious, the mysterious, the supreme power, Sri Madadya Bhagavati Siddha Lakshmi Sahasrakshari Sahasrakshari Sahasrarupani Mahavidyaya Sri Indra Rishi, the Gayatrayas, the Navakoti Shaktirupa Sri Madadya Bhagavati Siddha Lakshmi Devata Sri Madadya Bhagavati Siddha Lakshmi, the Vinioga from the grace of all the desires. (Clear water on the ground)
Put a flower in your hand. Once a lesson is completed, offer it at the feet of the goddess and pray for her grace.
Sahasrakshari Lakshmi Stotra Mantra- Om Aim Hrim Shrim Hasaun Shri Aim Hrim Klim Sauh Sauh Sauh Sauh Om Aim Hrim Klim Shrim Jai Jai Mahalakshmi, Vijaya Surasura Tribhuvana Nidanne Dayankure Sarva Tejo Rupini Viranchi Sansthite, Vidhi Varade Vishnu Dehavrite Mahamohini Nitya Varadana Tapare Mahasudhabdhi Vasini Mahatejo Dharini Sarvakarane Achintya Rupe Indradi sakal nirjar sevite samagaan singing singing singing singing victory Jayanti aparajite sarv sundari raktanshuke sura koti sankashe chandra koti sushitale agnikoti dahanshile yama koti vahanshile oomkar naad bindu rupani nigamaagama bhagyadayini sarv stri ratna swaroopini divya dehini nirgune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagune sagne Tatpare bahu varade sahasrakshare ayutakshare sapta koti lakshmi rupani anant koti brahmamanda nayika quarter of the fourteen Bhuvan Bhav Vikarine Gagan Vahini Nana Mantra Raj Virajite Sakal Sundari Gana Sevite Charanaravindra Mahatripura Sundari Kamash Dayite Karuna Rasa Kallolini Kalpavrikshadi sthite Manimandiresi Vishnu Vakshala Karine Ajite Ajite Amale Anupama Charite Muktikshetradhisthayini Please fulfill all desires, cut off all evils, cut off the pain of all the planets, the destruction of fear, destruction, destruction of all the three worlds. Sadhaya Sadhaya Hrim Sahasrakshari Siddha Lakshmi Mahavidyayai Namah. ।। Ome to Sri Mahalakshmi.