राजेश एक सरकारी अफसर हैं। बहुत बड़ा सरकारी बंगला मिला हुआ हैं। नौकर चाकर आदि सब चीज की सुविधा हैं। राजेश के पिता का जल्दी देहांत हो गया था। मरते वक्त उन्होंने अपने छोटे बेटे मुकेश का हाथ राजेश को सौंपते हुए कहा था “अब तुम ही इसके पिता हो”। तब से मुकेश का लालन पालन राजेश ने ही किया था। मुकेश शुरू से ही पढ़ाई में कमजोर था इसलिए राजेश ने उसे कपड़े की दुकान खुलवा दी थी। मुकेश की शादी भी हो गई और अब उसका एक बेटा हैं। मुकेश और राजेश दोनों के परिवार एक साथ में बड़े प्यार से रहती हैं।
एक दिन:-
“भैया! आपसे कुछ बात करनी हैं”मुकेश ने अपने बड़े भाई राजेश से कहा।
“अरे तो बाहर क्यों खड़ा हैं,अंदर आ ना!यह दफ्तर का थोड़ा काम निपटा लूं, फिर आराम से बातें करते हैं”। कुछ ही देर में राजेश ने फाइलें एक तरफ सरकाते हुए मुकेश से कहा “अब बता क्या बात हैं”?
“भैया! बात यह हैं कि…. समझ में नहीं आ रहा आपसे कैसे कहूं”?
“छोटे! अब कह भी डाल… पहेली सी क्यों बुझा रहा हैं” राजेश ने हंसते हुए कहा
“भैया !आज बबलू (राजेश का 12 वर्षीय पुत्र) ने मुन्नू को पीटा हैं.. अक्सर दोनों की लड़ाई होती रहती हैं। इसलिए राधा (मुकेश की पत्नी) भी अब चाहती हैं कि हम अलग रहे”।
“हम्म! देख मुकेश बच्चों का क्या हैं.. 1 मिनट में लड़ाई और दूसरे ही पल दोस्ती हो जाती हैं। बड़ों को इन के मामले में दखल नहीं देना चाहिए।”इतने में ही आठ वर्षीय मुन्नू दौड़ते हुए आया और राजेश की गोदी में बैठकर अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाने लगा। “ताऊ जी-ताऊ जी देखो तो मेरे कितने अच्छे नंबर आए हैं’गणित में तो 100 /100 हैं”।
” शाबाश मुन्नू! इसके लिए ताऊ जी तुम्हें अवश्य ईनाम देंगे” राजेश ने मुन्नू को प्यार करते हुए कहा।
“ताऊ जी! पर इनाम तो बबलू भैया को मिलना चाहिए, क्योंकि वहीं मुझे पढ़ाते हैं।”
“लेकिन मुन्नू!बबलू भैया तो बहुत गंदे हैं। हमेशा ही तुझे मारते रहते हैं आज भी तो तुझे मारा था ना?”
“वो क्या हैं! आज बबलू भैया ने तो मेरा कान ही पकड़ा था। मैंने गणित का सवाल जो गलत किया था। गुस्से में मैंने बबलू भैया की कॉपी फाड़ दी। तभी उन्होंने मुझे मारा था और फिर मैंने बबलू भैया की शिकायत मम्मी से कर दी। बबलू भैया तो बहुत अच्छे हैं।”
राधा जो कमरे के बाहर खड़ी होकर यह सब सुन रही थी वह भी कमरे के अंदर आ गई और राजेश के पैर छूकर बोली “भैया!हमें क्षमा कर दीजिए। आज आपने हमें बहुत ही बड़ी सीख दी हैं। आख़िर बच्चे तो बच्चे ही हैं पर हम बड़ों में तो समझदारी होनी चाहिए।”













