भक्त मन्दिर में जाकर अपने भगवान् से प्रार्थना करने लगीं शिश नवाकर अन्तर्मन से भाव विभोर हो कभी निहारती कभी वन्दन करती। कभी खत्म न होने वाली प्रार्थना अनेक प्रकार से शिश झुकाकर वन्दना करने लगी दिल था कि थामे नहीं थम रहा था। प्राण नाथ को धीरे से पुकारता। आंसू थे कि दिल में उतर आए ऐसे में भगवान कैसे न आते। भगवान् भी सामने खड़े है।जय श्री राम अनीता गर्ग













