हरियाली तीज के दिन सुहागिन महिलाएं दिन भर व्रत-उपवास करती हैं. साथ ही
वस्त्र :-
इस दिन माता जी बहने सोलह श्रृंगार करती हैं, जिनमें ह:-री साड़ी और हरी चूड़ियों का विशेष महत्व है.
गीत /संगीत /मस्ती :-
दिन-भर स्त्रियां तीज के गीत गाती हैं और नाचती हैं. हरियाली तीज पर झूला झूलने का भी विधान हैं. स्त्रियां अपनी सहेलियों के साथ झूला झूलती हैं. कई जगह पति के साथ झूला झूलने की भी परंपरा है.
पूजा :-
शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन के बाद चंद्रमा की पूजा की जाती है.
भेट :-
इस दिन सुहागिन स्त्रियों को श्रृंगार का सामान भेंट किया जाता है. खासकर घर के बड़े-बुजुर्ग या सास-ससुर बहू को श्रृंगार दान देते हैं. हरियाली तीज के दिन खान-पान पर भी विशेष ज़ोर दिया जाता है.
बहनो कॊ कोथली मे घेवर ‘पटासे ‘बिस्कुट ‘मट्ठी व तिअल (वस्त्र )देने का विधान है
पकवान :-
तीज के मौके पर विशेष रूप से घेवर, जलेबी और गुलगुले ‘सुहाली व पकौड़े एवम मालपुए बनाए जाते हैं. रात के समय खाने में पूरी, खीर, हल्वा, रायता, सब्जी और पुलाव बनाया जाता है
कढ़ाई :-
इस दिन कढ़ाई करने ‘गुलगुले ‘सुहाली ‘पकौड़े’पूरी आदि बनाने का भी विशेष महत्व है
कोथली :-
बहनो कॊ घेवर ‘पटासे ‘मट्ठी ‘बिस्कुटऔऱ वस्त्र दान का भी विशेष महत्व है
पिंग (झूला )
पहले प्रत्येक महोले ‘जोहड़ ‘चौक पर ‘पेड़ो पर झूले झूलने का व सावन के गीतो का विशेष महत्व था
गाँव मे इस दिन कुश्तियों व kbbdi के खेल भी करवाए जाते है
बागो
मे अमिया(aam) ‘सावन मे ही पकते है ‘बागो मे झूले डलते है
विशेष :-
सावन (बरसात )क़ी खुशी /मस्ती व त्योहारो के आगमन स्वरूप तीज का त्यौहार मनाया जाता है
तो सभी साथियो कॊ परिवार सहित तीज के त्यौहार क़ी हार्दिक शुभकामनाए :—













