आज अभी होलिका जलेगी । इसे संवत जलना भी बोलते हैं । पुराना संवत जल जाता है और नए संवत की शुरुवात होती है ।
तो आज सभी होलिका जलते समय उसकी तपिश को शरीर पर अनुभव करते हुए यह धारणा करेंगे कि हे अग्निदेव , आप साक्षात भगवत स्वरूप हैं , इसीलिए आपको भगवदजिह्वा भगवान बोला जाता है ।
इस अग्नि रूपी जीभ से आप सब कुछ भक्षण करते हैं और सब शुद्ध करते हैं ।
अग्नि कभी दूषित नहीं होती और वह सदा एक सी बनी रहती है । सब कुछ भक्षण करते हुए भी आप निर्लेप अवस्था में रहते हैं ।
तो हे भगवदस्वरूप अग्निदेव मेरे भी समस्त विकारों का भक्षण कर उसको भस्म कर दें ।
जिस प्रकार आपने राक्षस प्रवृत्ति होलिका जो भक्ति स्वरूप प्रह्लाद को नष्ट करना चाहती थी , उसे भस्म कर भक्ति की रक्षा की , ठीक उसी प्रकार मेरे सभी दुर्गुण जैसे काम , क्रोध , लोभ , मोह , मद , मात्सर्य , राग , द्वेष इत्यादि जो मेरी भक्ति को नष्ट किये जा रहे हैं , उसे उसी प्रकार जला कर भस्म कर दीजिए और मेरे हृदय में भक्ति का प्रकाश आलोकित कर दीजिए ।
जलते हुए होलिका को देखते समय यह ध्यान करें कि मेरे हृदय में मस्तिष्क से सभी दुर्गुण निकल कर इस अग्नि में भस्म हो रहे हैं , उनको तड़पते हुए देखिये ।
तड़ तड़ की आवाज़ को सुनकर ऐसा समझिये कि वह सभी एक एक कर जलते चले जा रहे हैं ।
जिस प्रकार पुराना संवत जल रहा है , उसी प्रकार मेरे पुराने दुर्भाग्य जो अभी तक मेरे पीछे लगे हुए थे , वह सब भस्म हो रहे हैं और मैं नित्य निरन्तर परिशोधित होते हुए बिल्कुल शुद्ध हो रहा हूँ ।
परम शुद्ध और चेतनामय हो रहा हूँ ।
जिस प्रकार अग्नि वर्ण है उसी प्रकार सब दुर्गुण भस्म होते हुए मेरे मन मस्तिष्क और अंतःकरण दिव्य अग्निमय भगवा वर्ण के होते जा रहे हैं ।
उसकी तपिश को अनुभव करते हुए यह धारणा और ध्यान बनाते रहिय्ये ।
उसको देखते रहिये और जिस प्रकार अग्नि की शिखा आकाश चूम रही है , ठीक उसी प्रकार मेरी भक्ति की शिखा भगवान के लोकों को छू रही है और उनको द्रवित कर रही है ।
यह धारणा बनाइये कि भक्त प्रह्लाद जी महाराज पूर्णतः स्वस्थ्य होकर आपको उसी अग्निमय स्वरूप से भक्ति और प्रेम का आशीर्वाद प्रदान कर रहे हैं ।
और आप उस आशीर्वाद को अग्नि के तपिश के माध्यम से ग्रहण कर रहे हैं ।।
कल सुबह जाकर फिर देख आईयेगा और उसकी राख को देखते हुए यह धारणा करियेगा कि यही है मेरे दुर्गुण जो काली राख बनकर पड़े हुए हैं ।
इस तरह आपका होलिका जलाना सार्थक होगा













