धीरे धीरे अखियां माँ खोल रही है लगता है। ऐसा मैया कुछ बोल रही है
दुनिया के नज़ारे तो बेज़ान लगते सुरज चंदा कोड़ी के समान लगते आत्मा में अमृत माँ धोल रही है लगता है
आएगी जरुर मैया आज सामने अपने भक्तों का मैया हाथ थामने मिलने का मौका माँ टटोल रही है लगता है
भक्तों की ऐसी माँ तकदीर चाहिए आत्मा में तेरी तरबीर चाहिए ऐसा ये असर दिल पे छोड़ रही हे लगता है….













