राम नाम महिमा
राम नाम महिमा
स्कन्दपुराण के ब्राह्मखंड में व्यास जी कहते हैं – जो लोग राम-राम-राम इस मंत्र का उच्चारण करते हैं, खाते, पीते, सोते, चलते और बैठते समय, सुख में या दुःख में राम मंत्र का जप करते हैं, उन्हें दुःख, दुर्भाग्य व व्याधि का भी भय नहीं रहता। उनकी आयु, सम्पति और बल प्रतिदिन बढ़ते रहते हैं। राम का नाम लेने से मनुष्य भयंकर पाप से छूट जाता है। वह नरक में नहीं पड़ता और अक्षय गति को प्राप्त होता है।
पार्वती द्वारा शिव जी से पूछने पर शिवजी कहते हैं
पद्मपुराण उत्तरखंड
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने।।
रकारादीनि नामानि शृण्वतो मम पार्वति।
मन: प्रसन्नतां याति रामनामाभिशंकया।। (पद्म. उत्तर. २८१।२१-२२)
’मैं तो ‘राम! राम! राम!’ इस प्रकार जप करते हुए ‘श्रीराम’ नाम में ही निरन्तर रमण किया करता हूँ। ‘राम’ नाम सम्पूर्ण सहस्त्रनाम के समान है। रकारादि जितने नाम हैं, उन्हें सुनकर ‘राम’ नाम की आशंका से मेरा मन प्रसन्न हो जाता है।’
रामचरितमानस
महामंत्र जोइ जपत महेसू। कासीं मुकुति हेतु उपदेसू॥
महिमा जासु जान गनराऊ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ॥
भावार्थ:- “राम” नाम वह महामंत्र है जिसे श्रीशंकर जी निरन्तर जपते रहते हैं, जो कि जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होने के लिये सबसे आसान ज्ञान है। “राम” नाम की महिमा को श्रीगणेश जी जानते हैं, जो कि इस नाम के प्रभाव के कारण ही सर्वप्रथम पूजित होते हैं।
नहिं कलि करम न भगति बिबेकू। राम नाम अवलंबन एकू॥
कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू॥
भावार्थ:- कलियुग में न तो कर्म है, न भक्ति है और न ज्ञान ही है, केवल “राम” नाम ही एकमात्र आधार है। जिस प्रकार कपटी कालनेमि को मारने में श्रीहनुमान जी समर्थ हैं उसी प्रकार बुद्धिमान मनुष्य कलियुग में कालनेमि रूपी कपट को “राम” नाम से मारकर कपट-रहित हो जाते हैं।













