खाता हूं में तेरा दिया क्या तुझको खिलाऊं में। मेरा तो कुछ भी नही, क्या भोग लगाऊं में।
तुमसे ही तो रोशन है, दुनियां के अंधेरे श्याम। फिर तेरे दरपे भला, क्यूं दीप जलाऊं में। खाता..
हे निराकार भगवन, तेरा आकार नहीं। तुझे केशर चंदन का, क्या लेप लगाऊं में। खाता.
कण कण में वास तेरा, घट घट का स्वामी तूं। ये फूल भी तेरे है, क्या भेट चढ़ाऊं में। खाता…
में तो चला घड़ने को, तेरी ही मूरत श्याम। दुनियां को जिसने रचा, उसे कैसे बनाऊं में। खाता ….
तूने तो सजाया है हर तन को बड़े प्रेम से। में तो हूं तेरा ही घड़ा, क्या तुझको सजाऊं में। खाता













