प्रभु सर्वाधार है, महीमा आपार है। शरण में जो आ गया उसका बेड़ा पार है। सूरज चाँद बनाये उसने, तारे खूब सजाये हैं।
तारे खूब सजाये हैं ॥ प्रभु सर्वाधार है, महीमा आपार है।
हाथों बिना पहाड़ बनाये, सुन्दर फूल खिलाये हैं।
सुन्दर फूल खिलाये हैं ।॥ प्रभु सर्वाधार है, महीमा आपार है।
शुभ कर्मों से मानुष का यह, सुन्दर चोला पाया है।
सुन्दर चोला पाया है ॥ प्रभु सर्वाधार है, महीमा आपार है।
विषय विकारों में फँसकर क्यों, इसको दाग लगाया है।
इसको दाग लगाया है ॥
प्रभु सर्वाधार है, महीमा आपार है।
कर बिनु कर्म करे विध नाना, रामायण में आता है।
रामायण में आता है। प्रभु सर्वाधार है, महीमा आपार है।
अद्भुत रचना लीला उसकी, वेद भी यही बतलाता है।
वेद भी यही बतलाता है। प्रभु सर्वाधार है, महीमा आपार है।
बुद्धि निर्मल करो हमारी, शरण तुम्हारी आये हैं।
शरण तुम्हारी आये हैं। प्रभु सर्वाधार है, महीमा आपार है। भक्ति का दो वरदान प्रभु जी, चरणों में शीश नवाये हैं।
चरणों में शीश नवाये हैं। प्रभु सर्वाधार है, महीमा आपार है।
जय श्री राम अनीता गर्ग













