उनके पूर्व जन्म का रहस्य क्या है?
फाल्गुन पूर्णिमा, 1486 ईस्वी।
नवद्वीप (बंगाल) में गंगा तट पर एक दिव्य बालक का जन्म हुआ।
पिता — जगन्नाथ मिश्र।
माता — शाची देवी।
बालक का नाम रखा गया — विश्वंभर।
परंतु प्रेम से सब उन्हें “निमाई” कहने लगे,
क्योंकि उनका जन्म नीम के वृक्ष के नीचे हुआ था।
बचपन से ही वे असाधारण थे।
रोते तभी थे जब कोई “हरि बोल” कहता।
छोटे से निमाई जब हँसते, तो घर में आनंद छा जाता।
युवावस्था में वे महान विद्वान बने।
नवद्वीप के बड़े-बड़े पंडित उनसे शास्त्रार्थ में हार जाते।
परंतु एक दिन गया धाम की यात्रा ने सब बदल दिया।
वहाँ गुरु से दीक्षा लेने के बाद उनका हृदय पूरी तरह कृष्ण-प्रेम में डूब गया।
गौड़ीय वैष्णव परंपरा के अनुसार —
वे स्वयं श्रीकृष्ण हैं,
जो श्रीराधा के प्रेम को अनुभव करने के लिए
राधा-भाव और स्वर्णिम कांति धारण कर प्रकट हुए।
भागवत पुराण (11.5.32) में संकेत मिलता है —
“कृष्णवर्णं त्विषाकृष्णं…”
अर्थात कलियुग में भगवान स्वर्णिम वर्ण में संकीर्तन द्वारा प्रकट होंगे।
विस्तृत कथा — घमंडी पंडित का परिवर्तन🙏
नवद्वीप में एक अत्यंत विद्वान पंडित थे।
वे वेद-शास्त्र के ज्ञाता थे,
पर हरिनाम संकीर्तन को साधारण लोगों का कार्य समझते थे।
जब महाप्रभु ने नगर में हरिनाम संकीर्तन प्रारंभ किया,
मृदंग और करताल गूंजने लगे।
लोग नाचने लगे।
सभी गा रहे थे —
हरे कृष्ण हरे कृष्ण
पंडित ने उपहास किया —
क्या केवल नाम जपने से भगवान मिलेंगे?
महाप्रभु मुस्कुराए।
उन्होंने कोई तर्क नहीं किया।
बस कीर्तन में डूब गए।
उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे।
शरीर रोमांचित था।
वातावरण प्रेम से भर गया।
कीर्तन की ध्वनि जैसे सीधे हृदय को छू रही थी।
पंडित का अहंकार टूटने लगा।
उनकी आँखों से भी आँसू बह निकले।
वे रोते हुए बोले —
आज समझा कि भगवान ज्ञान से नहीं,
प्रेम से मिलते हैं।”
महाप्रभु ने उन्हें गले लगा लिया।
और कहा —
कलियुग में नाम ही परम धर्म है।
न धन चाहिए, न यश,
बस निष्काम भक्ति चाहिए।
उस दिन से वही पंडित हरिनाम के प्रचारक बन गए।
जाति-पांति से ऊपर उठो
तर्क से अधिक प्रेम को अपनाओ
हरिनाम संकीर्तन ही कलियुग का यज्ञ है
वे कहते थे
नाम लो, प्रेम करो, और सबको प्रेम दो।
जो भी सच्चे हृदय से हरिनाम लेता है,
उसका जीवन बदल जाता है।
अगर आप भी मानते हैं कि नाम में शक्ति है,
तो एक बार हृदय से जपिए
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे
जय जय श्री राधे













