जब कीर्तन में उतर आए स्वयं श्रीकृष्ण… हरेराम बाबा की अद्भुत प्रेम-लीला
कहा जाता है कि कुछ संत केवल भगवान का नाम नहीं लेते… वे भगवान को जीते हैं।
ऐसे ही महान संत थे श्री हरेराम बाबा।
जब भी बाबा महामंत्र का कीर्तन करते—
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे,
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
तो वे साधारण अवस्था में नहीं रहते थे।
कीर्तन करते-करते उन पर प्रेम का ऐसा आवेश आता कि उन्हें भगवान की साक्षात अनुभूति होने लगती।
उनके सामने अक्सर नीलवर्ण की दिव्य आभा प्रकट होती… और उसी प्रकाश में श्रीकृष्ण के दर्शन होते।
बाबा उस दिव्य प्रकाश को पकड़ने के लिए उसके पीछे-पीछे दौड़ पड़ते।
कुछ ही क्षणों में उनका शरीर कांपने लगता, वे मूर्छित हो जाते, और फिर कुछ देर बाद सामान्य स्थिति में लौटते।
यह दृश्य देखकर लोग समझ जाते कि बाबा पर कृष्ण-प्रेम की वर्षा हो रही है।
🚶♂️ कीर्तन करते-करते गन्ने के खेत को चीरते हुए निकल गए
एक बार श्री हरेराम बाबा, श्री गणेशदास जी और पुजारी श्री रामचंद्रदास जी—ये तीनों संत पैदल जगन्नाथ पुरी के दर्शन के लिए निकले।
रास्ते में वे निरंतर कीर्तन करते चलते थे।
एक दिन कीर्तन करते-करते बाबा पर ऐसा प्रेमावेश आया कि वे पास के घने गन्ने के खेत में दौड़ पड़े।
लगभग तीन मील तक खेत को चीरते हुए वे आगे निकल गए।
गन्ने की पत्तियों से उनका पूरा शरीर लहूलुहान हो गया,
और वे कई घंटों तक मूर्छित अवस्था में पड़े रहे।
ऐसी घटनाएँ यात्रा में कई बार हुईं।
लंबे समय बाद वे संत जगन्नाथ पुरी पहुँचे।
🙏 भूरामल सेठ को मिला अद्भुत वरदान
जयपुर में भूरामल बजाज नाम के एक व्यापारी रहते थे, जो बाबा के परम भक्त और शिष्य थे।
एक बार उन्होंने अपने तीन मंज़िला मकान की छत पर कीर्तन का आयोजन किया और बाबा को भी बुलाया।
बाबा ने कहा—
“छत पर कीर्तन ठीक नहीं है… पता नहीं कब प्रेमावेश आ जाए। बेहतर है आंगन में करें।”
लेकिन भूरामल के आग्रह पर बाबा छत पर ही कीर्तन में बैठ गए।
कीर्तन शुरू हुआ…
महामंत्र गूंजने लगा… और कुछ ही देर में बाबा भक्ति में ऐसे डूब गए कि नृत्य करते-करते अचानक छत से नीचे गिर पड़े।
सब लोग घबरा गए।
बाबा के हाथ में गंभीर चोट आई।
भूरामल को बहुत पछतावा हुआ कि उन्होंने बाबा की बात नहीं मानी।
उन्होंने बाबा को अपने घर पर रखकर लंबे समय तक सेवा की।
एक दिन बाबा प्रसन्न होकर बोले—
“भूरामल बच्चा! मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ, कुछ मांग लो।”
भूरामल ने विनम्रता से कहा—
बाबा, मेरी बस एक ही इच्छा है… मेरा शरीर भगवान का भजन करते-करते छूटे और मुझे उनके धाम की प्राप्ति हो।
बाबा मुस्कुराए और बोले—
ऐसा ही होगा… और तुम्हारी पत्नी भी तुम्हारे साथ भजन करते-करते भगवान के धाम जाएगी।
जब बाबा ने वैकुंठ जाता विमान देख लिया
कुछ समय बाद एक सुबह गालता आश्रम (जयपुर) में
श्री हरेराम बाबा, श्री गणेशदास जी और श्री रामचंद्रदास जी स्नान कर रहे थे।
स्नान के बाद बाबा माला जप रहे थे।
अचानक वे उठे… दोनों हाथ आकाश की ओर उठाकर बोले—
“बहुत अच्छे भूरामल बच्चा! धाम को पधारो… और ठाकुर जी को मेरी ओर से प्रणाम कहना।”
संतों ने आश्चर्य से पूछा—
“बाबा! आप आकाश की ओर देखकर किससे बातें कर रहे थे?”
बाबा शांत स्वर में बोले—
क्या तुमने देखा नहीं? भूरामल अपनी पत्नी के साथ दिव्य विमान में बैठकर वैकुंठ जा रहा है… उसी को आशीर्वाद दे रहा था।
कुछ ही देर बाद भूरामल के घर से एक सेवक आया और उसने बताया—
अभी थोड़ी देर पहले भूरामल सेठ और उनकी पत्नी का शरीर भजन करते-करते ही छूट गया।
उस क्षण सबको समझ आ गया—
सच्चे संत का वचन कभी खाली नहीं जाता।
भक्ति का रहस्य यही है:
जब नाम सच्चे प्रेम से लिया जाए
तो भगवान केवल सुनते नहीं, स्वयं प्रकट हो जाते हैं।













