जब भी
आपके हृदय में
कोई बात उठती है तो
आपके जानने से पहले परमात्मा तक
पहुंच जाती है
आप अपने हृदय से बहुत दूर हैं
और परमात्मा
आपके हृदय में ही विराजमान है।
प्रार्थना में चिल्ला-चिल्लाकर करने की
कोई बात नहीं है।
आपके पास कहने को है ही क्या जो
परमात्मा को मालूम नहीं है।
बस सिर झुकाकर उसके सामने बैठ जाइये
प्यासे होकर अपने आप को
एक असहाय बच्चे की तरह उसके
हाथों में छोड़ दीजिए।
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