संसार के बदलने
की प्रतीक्षा न करें।
अन्यथा प्रतीक्षा ही करते रह जाएंगे।
अंधकार में ही जियेंगे और
अंधकार में ही विलीन हो जाएंगे।
संसार तो सदा से है
परन्तु जीवन क्षण भंगुर है।
इसलिए एक बात का सदैव ध्यान रखें
बदलना है तो स्वयं को
कितने ही तूफान हों, आधियां हों,
भीतर एक ऐसा दीया है
जिसकी शमा जलाई जा सकती है।
बाहर कितना ही अंधकार हो
भीतर एक मंदिर है
जो रोशन हो सकता है।
जय श्री लक्ष्मी नारायण जी













