(हिंदी अर्थ सहित)
ॐ नमो भगवते लक्ष्मीनृसिंहाय। क्लीं ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनृसिंहाय नमः स्वाहा।
धर्मसंस्थापनार्थाय ज्वालामालावृताय ते।
होलिकादहनोद्भासि प्रह्लादरक्षकाय ते नमः।।१।।
हे प्रभु! आप धर्म की स्थापना के लिए ज्वालाओं की माला से घिरे हुए हो। होलिका दहन की ज्योति में प्रकट होकर प्रह्लाद की रक्षा करने वाले, आपको नमस्कार है।
जय लक्ष्मीविलासाय जय नृसिंह दयानिधे।
होलिकाज्वालामध्ये त्वं पावकोऽसि जगत्पते।।२।।
हे लक्ष्मी के साथ विहार करने वाले, हे दया के सागर नृसिंह! होलिका की ज्वालाओं के बीच आप ही अग्नि स्वरूप हो, जगत के स्वामी!
अधर्मनाशक ज्वालामालिन् प्रह्लादभक्तपालक।
स्तम्भोद्भव महावीर हिरण्यकशिपुदर्पहा।।३।।
अधर्म को नष्ट करने वाले, ज्वाला माला धारण करने वाले, प्रह्लाद के रक्षक, स्तंभ से प्रकट हुए महावीर, हिरण्यकशिपु के घमंड को चूर करने वाले!
होलिकाशय्यायां ज्वालारूपेण प्रकटित प्रभो।
अधर्मदर्पदहनकर्तः सत्यदीप प्रज्वल प्रभो।।४।।
होलिका की चिता पर ज्वाला रूप में प्रकट हुए प्रभु! अधर्म के घमंड को भस्म करने वाले, सत्य के दीपक को प्रज्वलित करने वाले!
ज्वालामालाधर श्रीलक्ष्मि-नृसिंह समन्विते।
पापतापभयं नाशय भक्तान् रक्ष रक्ष सर्वदा।।५।।
ज्वाला माला धारण करने वाले, लक्ष्मी सहित नृसिंह! पाप, ताप और भय को नष्ट करो, भक्तों की सदा रक्षा करो।
करालास्य उग्ररूप सौम्यदेह दयासागर।
त्वमेव शान्तिदात्री श्रीः सदा भक्तवत्सले।।६।।
भयंकर मुख वाले उग्र रूप, फिर भी सौम्य शरीर और दया के सागर! तुम ही शांति देने वाली लक्ष्मी हो, भक्तों पर सदा स्नेह रखने वाले।
होलिकाज्वालया दग्ध्वा रोगशोकभयं कुरु।
लक्ष्मीनृसिंहकृपया मम मङ्गलं विधेहि मे।।७।।
होलिका की ज्वाला से रोग, शोक और भय को जला दो। लक्ष्मीनृसिंह की कृपा से मेरे लिए मंगल करो।
अधर्मबीजसंहारिणि धर्मविटपवर्धिनि।
जगन्मातः सर्वसौभाग्यदायिनि रक्ष रक्ष नः।।८।।
अधर्म के बीज नष्ट करने वाली, धर्म के वृक्ष को बढ़ाने वाली, जगत की माता! सबको सौभाग्य देने वाली, हमारी रक्षा करो।
ॐ नृसिंहाय विद्महे, वज्रनखाय धीमहि। तन्नो सिंहः प्रचोदयात्।। क्लीं ह्रीं श्रीं भूर्भुवः स्वः।।९।।
हम नृसिंह को जानें, वज्रनख वाले को ध्यान करें, वह सिंह हमें प्रेरित करें। (बीज मंत्र: क्लीं ह्रीं श्रीं- तीनों लोकों में कृपा।)
फाल्गुने पूर्णचन्द्रे रङ्गोत्सवविभूषिते।
हृदयानि रञ्जयन्तु प्रेमरसेन सर्वदा।।१०।।
फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर रंगों से सजे उत्सव में, सबके हृदय प्रेम के रस से रंग जाएँ।
गुलालधूलिधूसरं विश्वं हास्येन पूरितम्।
वैरद्वेषं परित्यज्य सौहार्दं संप्रवर्तताम्।।११।।
गुलाल की धूल से सारा विश्व हँसी से भर जाए। वैर-द्वेष छोड़कर सौहार्द फैले।
नृत्यगीतप्रहर्षेण समाजः समुत्सवोत्सुकः।
भ्रातृभावेनैकत्वं प्रतीकं भवतु ध्रुवम्।।१२।।
नृत्य-गीत और हर्ष से समाज उत्सव में डूबे। भाईचारे से एकता का प्रतीक बने।
मदनोत्सवे वसन्ते पुष्पभरितभूतले।
कामदेवप्रसादेन प्रेमभावः प्रवर्धताम्।।१३।।
वसंत में मदनोत्सव पर फूलों से भरी भूमि में, कामदेव की कृपा से प्रेम भाव बढ़े।
रतिक्रीडास्पृहे मर्यादा धर्मसंयुते सुखे।
संस्कृतिं पावयेद् ध्रुवं लक्ष्मीनृसिंहसन्निधौ।।१४।।
रति-क्रीड़ा की इच्छा में मर्यादा और धर्म के साथ सुख हो। लक्ष्मीनृसिंह के समक्ष संस्कृति पवित्र हो।
रङ्गक्रीडा शुभप्रदा शुचिता सौजन्ययुक्तिका।
हर्षवृद्धिप्रदा भवतु भक्तानां हृदि नित्यदा।।१५।।
रंग खेल शुभ फल देने वाला, पवित्रता और सौजन्य से युक्त हो। भक्तों के हृदय में हर्ष बढ़ाए।
उच्चनीचभेदरहितः समदर्शी भवेद् जनः।
होलिकाज्वालया दग्ध्वा दम्भद्वेषकषायजम्।।१६।।
ऊँच-नीच का भेद मिटे, सब समदर्शी बनें। होलिका ज्वाला से दंभ-द्वेष के कषाय जल जाएँ।
हास्यगीतैः परस्परं संगच्छध्वं समन्विताः।
भारतभूमिः सदा प्रेममन्दिरं भवतु शुभम्।।१७।।
हँसी-गीत से एक-दूसरे से जुड़ो। भारत भूमि सदा प्रेम का मंदिर बने। ।। होलिकोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं ।।













