क्यों दर-दर पर जाकर भीख माँगनी है ? क्यों हर एक व्यक्ति से चेष्टा करनी है ? क्यों नहीं उससे माँगना जो सदैव देने के लिए तत्पर बैठा है? हम कहते हैं आज शिवजी पर जल चढ़ाएंगे काम नहीं बन रहा तो 15 दिन बाद फिर दूसरे भगवानका दरवाजा खटखटाएँगे,
इस तरह जब दर-दर पर भीख मांगोगे तो सदा भिखारी ही रहोगे। पर जब इकलौते सबको देने वाले दाता से माँगोगे… गजेंद्र मोक्ष की कथा आती है कि जब हाथी डूबने लगा तो उसने अपने परिवार वालों को बुलाया कोई नहीं आया तब वो विभिन्न देवताओं को बुलाने लगा तब एक देवता ने सोचा दूसरे को बुला रहे हैं दूसरे ने सोचा तीसरे को बुला रहे हैं केवल सूढ़ का आखिरी भाग पानी के ऊपर रहा और हरि को बुलाया और हरि दौड़े चले आए।
इसी प्रकार से ठाकुर जी हमारी हर इच्छा हर मनोकामना को सत्य रूप से श्रवण कर रहे हैं और हमारे लिए जो सबसे उत्तम है स्थिति परिस्थितियों के अनुसार वह श्री ठाकुर जी स्वयं प्रदान करेंगे। इसलिए दर दर के भिखारी मत बनो
जाना ही है तो मंदिर जाओ भिखारी बन कर जाओ और श्री ठाकुर जी से कहो ठाकुर जी आपकी कृपा प्राप्त करनी है।













