माता सीता प्राकट्य दिवस

जय सीता मैय्या

मित्रों, सुप्रभातम्

वरिष्ठ जनों को सादर प्रणाम,

शुक्रवार, 21 फरवरी, 2025
विक्रमी संवत 2081, शक संवत 1946
फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष
नक्षत्र: अनुराधा
राहु कालम: 11:10 प्रातः से 12:35 दोपहर
अष्टमी तिथि
महाकुंभ 2025
सीताष्टमी
माता सीता प्राकट्य दिवस

पर्व मंथन

आज माता सीता प्राकट्य दिवस पर्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को माता जानकी जन्मोत्सव  का पर्व मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार माता जानकी जन्मोत्सव को सीता अष्टमी और श्री जानकी (सीता) नवमी  भी कहा जाता है। वैवाहिक जीवन की समस्याओं को दूर करने के लिये इस दिन माँ सीता और प्रभु श्री राम  की पूजा की जाती है। माता सीता की पूजा का आरंभ गणेश जी तथा अंबिका जी की अर्चना से किया जाता है। इसके बाद माँ सीता जी की मूर्ति या तस्वीर पर पीले फूल , कपड़े और श्रृंगार का सामान चढ़ाकर पूजन किया जाता है।माता सीता के जन्मोत्सव से जुड़ी कथा के अनुसार, एक बार जब राजा जनक हल से धरती जोत रहे थे तभी उनका हल किसी कठोर चीज से स्पर्श  हुआ जब राजा जनक ने देखा तो वहां से उन्हें एक छोटा सा सन्दूक प्राप्त हुआ। उस सुंदर से सन्दूक में एक सुंदर कन्या  थी। राजा जनक के कोई संतान नहीं थी, वे उस कन्या को अपने साथ ले आए। इस कन्या का नाम ही सीता  रखा गया। राजा जनक की ज्येष्ठपुत्री होने के कारण ये जनक दुलारी  कहलायीं। माता सीता को माता लक्ष्मी जी का ही स्वरूप माना जाता है। आज के दिन माता सीता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना  की जाती है।

आप सभी को परिवार सहित माता सीता प्राकट्य दिवस की मंगल कामनाएं



Jai Sita Maiya

Friends, good morning

Regards to senior people,

Friday, 21 February, 2025 Vikrami Samvat 2081, Shak Samvat 1946 Falgun month Krishna Paksha Nakshatra: Anuradha Rahu Kalam: 11:10 am to 12:35 pm Ashtami date Mahakumbh 2025 Sitashtami Mother Sita Prakatya Day

Festival churning

Today is the festival of Mata Sita Pratiya. According to the Hindu calendar, the festival of Mata Janaki Janaki birth anniversary is celebrated on the Krishna Paksha Ashtami date of Phalgun month. According to beliefs, Mata Janaki Janmotsav is also called Sita Ashtami and Shri Janaki (Sita) Navami. Mother Sita and Lord Shri Ram are worshiped on this day to overcome the problems of marital life. The worship of Mother Sita is started with the archana of Ganesha and Ambika. After this, the idol or picture of Maa Sita is worshiped by offering yellow flowers, clothes and makeup items on the statue. According to the story associated with the birth anniversary of Mother Sita, once the king Janak was plowing the earth with a plow, only then the solution of them is a stringent. When King Janak saw the thing, he got a small ark from there. There was a beautiful girl in that beautiful to ark. King Janak had no children, he brought that girl with him. This girl was named Sita. Being the eldest of King Janaka, she was called Dulari. Mother Sita is considered to be the form of Goddess Lakshmi. On this day, worship of Goddess Sita is done by law.

Wish all of you all with family Sita Prakatya Day

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