भगवान देख रहा 1

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हे परमात्मा जी मै कहती। भगवान् देख रहा है। मै जब भी घर में कार्य करती मेरा अन्तर्मन पुकारता भगवान् देख रहा है। तु मन में पवित्र भावना से कार्य कर। यदि तुने कुछ भी हेरफेर की तो भगवान को क्या कहेगी। क्योंकि भगवान् देख रहा है। मै भगवान से कार्य करते हुए प्रार्थना करती कि हे प्रभु हे स्वामी भगवान् नाथ मेरे मन में पवित्रता बनी रहे। मेरा भगवान् हर चीज़ में जङ और चेतन में समाया है। मेरा भगवान् देख रहा है। मेरे दिल में हर क्षण यह भाव बना रहता मेरा प्रभु प्राण नाथ प्यारा स्वामी भगवान् नाथ देख रहा है। भगवान देख रहे हैं भक्त भगवान को हर क्षण भजना चाहता है। भक्त भगवान को दिल में बिठा लेता है। नैनो में बसा लेता है। भक्त के दिल की एक ही तमन्ना होती है कैसे किसी तरह से मुझे भगवान का मुझे अहसास हो। भगवान की विनती स्तुति प्रार्थना करते हुए भगवान के दर्शन की इच्छा जाग्रत हो जाती है। हर क्षण मन ही मन भगवान को भजता है। भगवान को भजते हुए भक्त के अन्तर्मन मे भगवान देख रहे हैं का भाव बनने लगता है। भगवान देख रहे हैं के भाव को अपने जीवन में अपना लेता है। जब भी कुछ बात हो  कार्य करते हुए भक्त के दिल में भगवान की विनती स्तुति के साथ भगवान देख रहे हैं का भाव दृढ होता जाता है। हर कार्य करते हुए अन्तर्मन पुकारता भगवान देख रहा है पवित्रता आ जाती है। ऐसे मै कई वर्षों तक भगवान देख रहे हैं के भाव के साथ अपने जीवन को ढाल लेती हूँ। भगवान देख रहे हैं का भाव मेरे जीवन का हिस्सा बन जाता है। सुबह से शाम तक भगवान देख रहे हैं का भाव मेरे जीवन का हिस्सा बन जाता है। मेरा अन्तर्मन बार बार पुकारता भगवान देख रहे हैं। कभी भाव की गहराई में खो जाती फिर पुकारती भगवान देख रहा है। एक दिन ऐसा आया जब मैं रोटी बना रही होती तब मुझे ऐसा महसूस होता भगवान सामने खङे है भगवान देख रहे हैं। भक्त के दिल में जब यह भाव जाग्रत होगा तभी भक्त अन्तर्मन से भगवान को नमन करेगा अन्तर्मन की आंखों से भगवान को निहारने लगता है। भक्त की भक्ति दृढ होती तब भक्त का भगवान कण-कण में बैठा है। रोम रोम को प्रकाशित करता है।उठते बैठते एक ही भाव भगवान देख रहे हैं, भगवान देख रहे हैं।भाव की गहराई को वहीं समझ सकता है जिसने भाव में गहरी डुबकी लगाई है। भगवान देख रहा है का भाव में मुझे ऐसे लगता जैसे भगवान सामने खड़े मुस्करा रहे हैं ये अन्तर्मन के भाव है। भगवान को भक्त अन्तर्मन से प्रार्थना करते हुए कहता है कि हे स्वामी भगवान नाथ मै तुम्हे हर क्षण भजना चाहता हूं तुम मेरे दिल में नैनो में बस जाओ, मुझे हर ध्वनि में आप ही दिखाई देते रहो। ये दिल प्रभु प्राण नाथ का बनना चाहता है।ये सब भाव है। भक्त बार से गृहस्थ जीवन के सब कार्य वैसे ही करता है जैसे सभी करते हैं। अन्तर्मन से भगवान के भाव में भगवान का ध्यान कर्म करते हुए करता है ।क्योंकि भक्त भगवान को दिल मे बिठा कर रखता है श्री राम अनीता गर्ग



हे परमात्मा जी मै कहती। भगवान् देख रहा है। मै जब भी घर में कार्य करती मेरा अन्तर्मन पुकारता भगवान् देख रहा है। तु मन में पवित्र भावना से कार्य कर। यदि तुने कुछ भी हेरफेर की तो भगवान को क्या कहेगी। क्योंकि भगवान् देख रहा है। मै भगवान से कार्य करते हुए प्रार्थना करती कि हे प्रभु हे स्वामी भगवान् नाथ मेरे मन में पवित्रता बनी रहे। मेरा भगवान् हर चीज़ में जङ और चेतन में समाया है। मेरा भगवान् देख रहा है। मेरे दिल में हर क्षण यह भाव बना रहता मेरा प्रभु प्राण नाथ प्यारा स्वामी भगवान् नाथ देख रहा है। भगवान देख रहे हैं भक्त भगवान को हर क्षण भजना चाहता है। भक्त भगवान को दिल में बिठा लेता है। नैनो में बसा लेता है। भक्त के दिल की एक ही तमन्ना होती है कैसे किसी तरह से मुझे भगवान का मुझे अहसास हो। भगवान की विनती स्तुति प्रार्थना करते हुए भगवान के दर्शन की इच्छा जाग्रत हो जाती है। हर क्षण मन ही मन भगवान को भजता है। भगवान को भजते हुए भक्त के अन्तर्मन मे भगवान देख रहे हैं का भाव बनने लगता है। भगवान देख रहे हैं के भाव को अपने जीवन में अपना लेता है। जब भी कुछ बात हो  कार्य करते हुए भक्त के दिल में भगवान की विनती स्तुति के साथ भगवान देख रहे हैं का भाव दृढ होता जाता है। हर कार्य करते हुए अन्तर्मन पुकारता भगवान देख रहा है पवित्रता आ जाती है। ऐसे मै कई वर्षों तक भगवान देख रहे हैं के भाव के साथ अपने जीवन को ढाल लेती हूँ। भगवान देख रहे हैं का भाव मेरे जीवन का हिस्सा बन जाता है। सुबह से शाम तक भगवान देख रहे हैं का भाव मेरे जीवन का हिस्सा बन जाता है। मेरा अन्तर्मन बार बार पुकारता भगवान देख रहे हैं। कभी भाव की गहराई में खो जाती फिर पुकारती भगवान देख रहा है। एक दिन ऐसा आया जब मैं रोटी बना रही होती तब मुझे ऐसा महसूस होता भगवान सामने खङे है भगवान देख रहे हैं। भक्त के दिल में जब यह भाव जाग्रत होगा तभी भक्त अन्तर्मन से भगवान को नमन करेगा अन्तर्मन की आंखों से भगवान को निहारने लगता है। भक्त की भक्ति दृढ होती तब भक्त का भगवान कण-कण में बैठा है। रोम रोम को प्रकाशित करता है।उठते बैठते एक ही भाव भगवान देख रहे हैं, भगवान देख रहे हैं।भाव की गहराई को वहीं समझ सकता है जिसने भाव में गहरी डुबकी लगाई है। भगवान देख रहा है का भाव में मुझे ऐसे लगता जैसे भगवान सामने खड़े मुस्करा रहे हैं ये अन्तर्मन के भाव है। भगवान को भक्त अन्तर्मन से प्रार्थना करते हुए कहता है कि हे स्वामी भगवान नाथ मै तुम्हे हर क्षण भजना चाहता हूं तुम मेरे दिल में नैनो में बस जाओ, मुझे हर ध्वनि में आप ही दिखाई देते रहो। ये दिल प्रभु प्राण नाथ का बनना चाहता है।ये सब भाव है। भक्त बार से गृहस्थ जीवन के सब कार्य वैसे ही करता है जैसे सभी करते हैं। अन्तर्मन से भगवान के भाव में भगवान का ध्यान कर्म करते हुए करता है ।क्योंकि भक्त भगवान को दिल मे बिठा कर रखता है श्री राम अनीता गर्ग

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