गुरु में श्रद्धा

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हमने गुरु किसलिए बनाया है। गुरू  हमारी श्रद्धा और विश्वास के आसन पर विराजमान होते हैं 

भगवान को भजते हुए गुरु का स्मरण करने से श्रद्धा और विश्वास प्रकट होगा। हमें जो भी प्राप्त होगा वह हमारी अन्तर्मन की खेती से ही होगा।

हम गुरू बनाते हैं, मन्दिर में जाते हैं, पाठ करते हैं। जब तक आप श्रद्धा से भगवान को भजते नहीं है तब तक गुरु और भगवान की कृपा बरसती नहीं है

एक भक्त का भाव होता है मै भगवान के दर्शन करना चाहता हूं। भगवान से मिलना चाहता हूं। मेरे भगवान कैसे दिखते होंगे। मै भगवान का बनना चाहता हूँ। भक्त के दिल के भाव ठहर ठहर कर उंमग जगाते है भक्त के हृदय का विस्वास दिन प्रति दिन दृढ होता जाता है।

मेरी आत्मा परमात्मा से साक्षात्कार कर ले। मेरे भगवान आएगे भक्त जानता है परमात्मा शरीर नहीं है आत्मा भी शरीर नहीं है परमात्मा प्रकाश का पुंज हैं आत्मा प्रकाश का अंश है अंश  अंशी समा जाना चाहता है। अपने मै तव को अपनी प्रभुसत्ता को मिटाकर एक होना चाहता है।मै है तब तू कैसे प्रकट हो मै के मिटते ही सबमे तू ही दिखाई दिया बाहर भी तू भीतर भी तू तेरी ही लीला है तेरी ही सता है राम राम राम राम राम जय श्री राम अनीता गर्ग

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One Response

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