भक्त की एक ही अभिलाषा होती है प्रभु भगवान के दर्शन कैसे हो प्रभु से मिलन हो तभी हृदय शान्त हो। रात दिन ग्रथ पढता है एक ग्रथं पढता है दुसरा तीसरा पढता जाता है। प्रभु भगवान नाथ को ग्रथों में खोज रहा है।नाम जप प्रार्थना करता है प्रभु ध्यान मे है। भगवान नाथ के नाम की पुकार लगाता है हे प्रभु प्राण नाथ हे दीनबंधु मै तुम्हे देखना चाहता हूं। हृदय की तङफ है प्रभु से मिलन की। भक्त रात दिन भगवान का नाम जप करता है। प्रभु दर्शन का अहसास नहीं होता है। भाव नहीं बन रहे। भाव कैसे बने प्रभु भगवान नाथ श्री हरि को नमन करता है पृथ्वी पर सिर टिका कर वन्दन करता है ।भगवान दिखाई नहीं देते भाव भी नहीं बन रहा भगवान नाथ के दर्शन की पुकार जिस हृदय में जग जाती है वही भगवान की याद में तडफता है भगवान के भाव भी नहीं बन रहे। भाव मे होते हुए भी ऐसा लगता है भगवान कब पुकार को सुनेंगे।भाव कैसे पैदा होगा जब हम एक ही पर दिल टिका देंगे। एक भजन, एक प्रार्थना मे डुब जायेंगे। दो महीने तीन महीने प्रतिदिन उन्हें गाते हुए पढते भाव पैदा होने लगेगा। भाव पैदा हो गया तब एक ही दिन में चार पांच बार गायेंगे फिर गुनगुनाने लगेगें भाव पैदा होने लगेगा।भाव मे गहरी ढुबकी लगायेंगे। भक्त भगवान मे खो जाता है तब भगवान के आने का अहसास होगा प्रति दिन चाहे रामायण का एक पेज ही पढे। पढते पढते भाव की जागृति होगी। एक ही पेज को बार बार भाव से पढेगे तब ध्यान मार्ग आ जाएगा। फिर सुबह उठते ही वह शब्द और भाव हमारे मन मे चल रहे होंगे। हर शब्द के अनेक विचार प्रकट होंगे। हम भाव में सब कुछ कर लेगें।भाव कुछ समय बनते रहेगे। भाव के बनने पर कार्य की कुशलता आ जायेगी, विचार पवित्र होगे। हम किसी से छल कपट नहीं करेंगे अपनी मान बढाई में भी नहीं होगें। हमारे विचारों में गहराई और सत्यता होगी। भाव हमारे भीतर की घङत कर देगा हम भाव से ओतप्रोत होगें। प्रभु भगवान नाथ के दर्शन का अहसास होगा।एक बार दर्शन का अहसास हो गया । दर्शन के भाव हमारे भीतर तङफ को जागृत करता है। भाव प्रभु प्रेम का पाठ पडाता है। प्रेम मे खोज है। भक्त हर क्षण प्रभु भगवान नाथ की खोज में लग जाता है।
भाव में भगवान छुपे बैठे हैं भाव कितने समय बना भक्त का हृदय कुछ समय के भाव से टिकता नहीं है भक्त भाव में खो जाना चाहता है। भाव चार पांच दिन भी बना रह सकता है भाव गहरा गया भाव छुटा नहीं तब भगवान किसी संत को भेजते हैं। भक्त अन्तर्मन से मानसिक बात करता है। बाहर से मौन है कुछ बोलता नहीं प्रणाम वन्दन करता है
हे स्वामी भगवान नाथ तुम मुझे दिखाई क्यों नहीं देते। तुम्हारी याद में मै खो जाना चाहती हू। हे नाथ मुझ से क्या भुल हुई प्रभु तुम मुझे छोड़ कर कंहा चले गए। ये दिल पुकारता तुम चले आओ
प्रभु से बात कर लेगें। हदय में प्रार्थना के बोल प्रकट होंगे। मेरे पास बाहर का कुछ भी नहीं है जो जीवन मे किया वर्षों तक करती रही उसके बाद जो दिखाई दिया उन्ही भाव शब्दों के मोती पिरोये है जय श्री राम अनीता गर्ग
जय श्री राम अनीता गर्ग
6.12. 25












