प्रभु की भक्ति

images T

प्रभु की भक्ति चाहे कितने कष्ट, कठिनाइयां, निन्दा तथा हानि सहन करने पर प्राप्त हो तो सस्ता सौदा समझो क्योंकि उसमें जो आनन्द निहित है, वह अमूल्य है।

ज़रा सोचो तो सही कि वह कौन सी महान शक्ति है जिसके बल पर तुम इतने बड़े-बड़े काम कर रहे हो? तुम्हारे इस निर्बल शरीर से तो यह काम होने असम्भव हैं।

वह शक्ति सद्गुरु की कृपा से गुप्तरूप से तुम्हारे अंदर काम कर रही है इसलिए तुम्हें सदगुरु का आभारी होना चाहिये और हर समय उनकी सेवा-पूजा में सलंग्न रहना चाहिये।

आंखों से प्रतिदिन देखते हो और कानों से सुनते हो कि सन्सारी लोग क्षणभंगुर सुख के लिए सिर भी देने से नहीं टलते, तुम उनसे शिक्षा ग्रहण करो कि भक्ति जो स्थायी सुख है उस पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करना पड़े तो भी कम है।

जब तुम्हारे भीतर मन का राज्य था तब तुममें न कुर्बानी थी, न सच्चा प्रेम था, न नम्रता थी, न विश्वास था। एक पाई की हानि भी असहनीय थी-थोड़ी -थोड़ी बात के लिए क्रोध आकर अधिकार जमा लेता था और मोह व लोभवश तुम सदैव चिन्तातुर रहते थे।

अब सदगुरु से आत्मिक धन प्राप्त हुआ है तो तुम्हारी दशा और की और हो गई है, अब सन्सार को धर्मशाला समझते हो।

शारीरिक सुखों को सदगुरु की कृपा पर न्यौछावर करते हो। कोई कम-अधिक बोले तो इधर से सुना और उधर से निकाला। भय के स्थान पर निर्भयता ने वास किया।

इससे यह प्रकट होता है कि तुम्हारे अंदर निर्भीक सद्गुरुदेव का राज्य है जो तुममें बैठकर आत्मिक शक्ति व नित्य आनन्द से परिपूर्ण कर रहे हैं ।

वे ही आनन्द की खान हैं। सदैव उनकी कृपा के आभारी रहो और उनकी महिमा गायन करो।



Devotion to GOD, no matter how many hardships, difficulties, blasphemy and loss may be obtained by enduring it, then consider it a cheap deal because the joy contained in it is priceless.

Just think, what is that great power on whose strength you are doing such great things? With this weak body of yours, this work is impossible.

That power is secretly working in you by the grace of the Sadguru, so you should be thankful to the Master and be engaged in his service-worship at all times.

Every day you see with your eyes and hear with your ears that worldly people do not hesitate to give their heads even for a fleeting happiness, you should learn from them that even if you have to sacrifice your everything for devotion, which is permanent happiness, it is less.

When you had the kingdom of mind, there was no sacrifice, no true love, no humility, no faith in you. The loss of even a single pie was unbearable – every little thing in anger used to take possession and you were always worried because of attachment and greed.

Now that spiritual wealth has been received from a Sadguru, your condition has become different. Now you consider the world to be a dharamsala.

You sacrifice your physical pleasures on the grace of the Sadguru. If someone spoke more or less, he heard it from here and took it out from there. Fearlessness resided in place of fear.

From this it appears that within you is the kingdom of the fearless Sadgurudev who is sitting in you and filling you with spiritual energy and eternal bliss.

They are the mines of joy. Always be grateful to his grace and sing his glory.

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest
Share on telegram
Share on email

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *