
नवधा भक्ति
नवधा भगति कहेउ तोहि पाहि। सावधान सुनू धरु मन माहीं।।प्रथम भगति संतन्ह कर संगा। दूसरी रति मम कथा प्रसंगा।।अर्थ –

नवधा भगति कहेउ तोहि पाहि। सावधान सुनू धरु मन माहीं।।प्रथम भगति संतन्ह कर संगा। दूसरी रति मम कथा प्रसंगा।।अर्थ –

बंधुओं यह बात लगभग 45- साल पुरानी है। जब मैं अपने घर के बाहर एक चबूतरे पर बैठकर राम चरित्र

सांकरी गली एक ऐसी गली है जिससे एक – एक गोपी ही निकल सकती है और उस समय उनसे श्याम

एक गोपी एक वृक्ष के नीचे ध्यान लगा बैठ जाती है। कान्हा को सदा ही शरारतें सूझती रहती हैँ। कान्हा

रामायणकी शक्तिकी कौन कहे, क्या कहीं नजर आता है ऐसा सम्राट्, साम्राज्य, अवतार या पैगम्बर जो भगवान् श्रीरामकी तुलनामें ठहर

भगवान शिव के एक बहुत बड़े भक्त थे, जिनका नाम था नरहरि सुनार। वह पंढरपुर में रहते थे। शिव भक्ति

महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद अर्जुन को वहम हो गया कि वो श्री कृष्ण के सर्व श्रेष्ठ भक्त है,अर्जुन

एक बार मैं ट्रेन से आ रहा था, मेरी साथ वाली सीट पर एक वृद्ध औरत बैठी थी जो लगातार

एक गाँव में भोला केवट रहता था। वह भोला ही था इसी से उसका नाम भोला पड़ गया था। कोई

श्री रूप गोस्वामी जी पर राधाकृष्ण की कृपा की वृष्टिनिरन्तर बनी रहती थी।उन्हें प्राय: हर समय उनकी मधुर लीलाओं की