
गुरु और भगवान में एक अंतर है गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं
एक आदमी के घर भगवान और गुरु दोनो पहुंच गये। वह बाहर आया और चरणों में गिरने लगा। वह भगवान

एक आदमी के घर भगवान और गुरु दोनो पहुंच गये। वह बाहर आया और चरणों में गिरने लगा। वह भगवान

।। ।। ॐ आञ्जनेयाय नमः।ॐ महावीराय नमः।ॐ हनूमते नमः।ॐ मारुतात्मजाय नमः।ॐ तत्वज्ञानप्रदाय नमः।ॐ सीतादेविमुद्राप्रदायकाय नमः।ॐ अशोकवनकाच्छेत्रे नमः।ॐ सर्वमायाविभंजनाय नमः।ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे

‘सखियों, कल चलोगी गोरस बेचने ?’– ललिता जीजी ने पूछा।हम सब जल भरने आयी थी। उधरसे बरसाने की सखियाँ भी

उदयकुँवर बाईसा ने भय और आश्चर्य से उनकी ओर देखा।‘हाँ जीजा हुकुम, अब आप चाहे जो फरमायें मौड़ौं और यात्रियों

संकीर्तन और सत्संग मे जाने से फ़ायदा ही फ़ायदा होता है।कभी नुकसान नही होता।एक अँधा फूलों के बाग में चला

शिवपुराण संहिता में कहा है कि सर्वज्ञ शिव ने संपूर्ण देहधारियों के सारे मनोरथों की सिद्धि के लिए इस ‘ॐ

हाड़ीजी और उनके साथ पचास साठ स्त्रियाँ मीरा को लेकर भूत महल की ओर चलीं।मीरा की दासियों ने सारी रात

दिन ढलने पर मैं स्वयं ही उपस्थित हो जाऊँगी।तुम जाकर निवेदन कर देना कि मुझे भी बुजीसा हुकुम के दर्शन

जय गुरुदेव शिष्य और गुरु का रिश्ता बड़ा विचित्र रिश्ता होता है जो भगवान राम ने कृष्ण ने और बड़े-बड़े

माता पार्वती भगवान शंकर से पूछती हैं- प्रभु जे मुनि परमारथबादी।कहहिं राम कहुँ ब्रह्म अनादी।। सेस सारदा बेद पुराना।सकल करहिं