भगवान (Bhagvan)

आञ्जनेय अष्टोत्तरशत नामावलि

।। ।। ॐ आञ्जनेयाय नमः।ॐ महावीराय नमः।ॐ हनूमते नमः।ॐ मारुतात्मजाय नमः।ॐ तत्वज्ञानप्रदाय नमः।ॐ सीतादेविमुद्राप्रदायकाय नमः।ॐ अशोकवनकाच्छेत्रे नमः।ॐ सर्वमायाविभंजनाय नमः।ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे

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“गौरस बेचन हौं चली”

‘सखियों, कल चलोगी गोरस बेचने ?’– ललिता जीजी ने पूछा।हम सब जल भरने आयी थी। उधरसे बरसाने की सखियाँ भी

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मीरा चरित भाग- 77

उदयकुँवर बाईसा ने भय और आश्चर्य से उनकी ओर देखा।‘हाँ जीजा हुकुम, अब आप चाहे जो फरमायें मौड़ौं और यात्रियों

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हे गोपाला

संकीर्तन और सत्संग मे जाने से फ़ायदा ही फ़ायदा होता है।कभी नुकसान नही होता।एक अँधा फूलों के बाग में चला

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मीरा चरित भाग- 85

हाड़ीजी और उनके साथ पचास साठ स्त्रियाँ मीरा को लेकर भूत महल की ओर चलीं।मीरा की दासियों ने सारी रात

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मीरा चरित भाग- 84

दिन ढलने पर मैं स्वयं ही उपस्थित हो जाऊँगी।तुम जाकर निवेदन कर देना कि मुझे भी बुजीसा हुकुम के दर्शन

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