भगवान (Bhagvan)

मीरा चरित भाग- 37

भोजराज की अंतर्वेदना और अंतर्द्वंद्व …. डेरे पर आकर वे कटे वृक्ष की भाँति पलंग पर जा गिरे। पर वहाँ

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मीरा चरित भाग- 35

उसने रैदासजी का इकतारा उठाया और गाने लगी- म्हारे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई।जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति

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मीरा चरित भाग- 36

ऐसी आशीष अब कभी मत दीजियेगा। आपके इस छोटे से भाई में इतना बड़ा आशीर्वाद झेलने का बल नहीं है।’कभी

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भगवान सूर्य की उपासना

।। ॐ सूर्याय नमः ।। सूर्यदेव यानि कलयुग के एकमात्र दृश्यदेव, जिन्हें ग्रहों का राजा भी माना गया है। वहीं

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“चंचल मन”

एक बार आश्रम में एक नया शिष्य आया, आश्रम के नियमानुसार उसे भी प्रतिदिन संध्या – उपासना करनी थी !

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मीरा चरित भाग- 34

रनिवास में कानाफूसी….. राज्याभिषेक के समय वीरमदेवजी की आयु अड़तीस वर्ष थी। संवत् १५५३ में राणा रायमल की पुत्री और

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