
मीरा चरित *भाग- 16*
राठौड़ वीर दूदाजी सचमुच बहुत भाग्यशाली थे। यौवनकालमें वे उद्भट योद्धा थे, अन्तः सलिला भक्ति-भागीरथी अब वार्धक्यमें जैसे कूल तोड़कर

राठौड़ वीर दूदाजी सचमुच बहुत भाग्यशाली थे। यौवनकालमें वे उद्भट योद्धा थे, अन्तः सलिला भक्ति-भागीरथी अब वार्धक्यमें जैसे कूल तोड़कर

श्री गुरू नानक देव साहिब जी के उत्तराधिकारी के रूप में श्री गुरू रामदास जी मानव कल्याण के कार्यों में

अक्सर कुछ लोग सोचते है कि सतगुरु से ज्ञान अर्थात नामदान लिये कई वर्ष हो गए थोड़ा बहुत भजन सिमरन

।। श्रीहनुमते नमः ।। श्रीगुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुरु सुधारि।बरनऊं रघुवर बिमल जसु जो दायक फल चारि।। अर्थ-श्रीगुरुजी

ॐ वन्दे सन्तं श्रीहनुमन्तं रामदासममलं बलवन्तम् । ।रामकथामृतमधु निपिबन्तं परमप्रेमभरेण नटन्तम् ।। प्रेमरुद्ध गलमश्रुवहन्तं पुलकाश्चित वपुषा विलसन्तम् । सर्वं राममयं

कल सुबह मैं होली की खरीदारी करने मार्केट जा रहा था।ठाकुर जी (बाल रुप) मुझसे कहने लगे :- बाबा मैं

तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरू रामभद्राचार्य जी महाराज ने हनुमान चालीसा की चौपाइयों में 4 गलतियां बताई है उन्होंने कहा कि पब्लिशिंग

‘संसारमें और भी तो बहुत कुछ स्पृहणीय है बेटी ! फिर इसी ओर तुम्हारी रुचि क्यों हुई? तुम्हारी आयुके बालक

किशोरी, मोहि देहु वृन्दावन वास ।कर करवा हरवा गुंजन के, कुंजन माँझ निवास ॥नित्यबिहार निरखि निसि वासर, छिन छिन चित्त

त्रिदेवों में शिव एक हैं. ब्रह्मदेव जहां सृष्टि के रचयिता माने गए हैं, वहीं विष्णु पालक और शिव संहारक माने