
जीव” जब “शिव” शरण में आये
॥ ॐ #सत्यम शिवम #सुंदरम परम् साक्षी भाव में रहके, निज आनन्द को पाये, काम-क्रोध मद लोभ-मोह, फिर कहीं नजर

॥ ॐ #सत्यम शिवम #सुंदरम परम् साक्षी भाव में रहके, निज आनन्द को पाये, काम-क्रोध मद लोभ-मोह, फिर कहीं नजर

एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से ऐसे गूढ़ ज्ञान देने का अनुरोध किया जो संसार में किसी भी

यह प्रसंग एक राजा की जिन्दगी का है, उसका नाम था राजा पीपा। उसने दुनिया में जो कुछ इन्सान पाना

अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने वाली भगवान राम और माता सीता की मूर्ति

शरद ऋतु की पूर्णिमा की रात, भगवान श्री कृष्ण, अपने सबसे प्रिय भक्तों, वृंदावन की गोपियों के साथ अपने सबसे

(श्री धाम वृन्दावन के लुटेरिया हनुमान) मर्कान भोक्षन्…(श्रीमद्भागवत) ये मेरा कल दोपहर का स्वप्न था… कल दोपहर में भोजन करके…

(तब ऋषि ने मुझे श्राप दिया था – हनुमान)भाग-4 सुनतहिं भयहुँ पर्वताकारा…(श्रीरामचरितमानस) अयोध्या के उस राज उद्यान में, भरत जी

बर्बरीक (खाटूश्याम) घटोत्कच के पुत्र और भीम के पोते थे. बर्बरीक भगवान शिव के एक बड़े भक्त थे. तपस्या और

(मैंने रामायण महाकाव्य लिखा था – हनुमान) बुद्धिमतां वरिष्ठम्…(गो. श्री तुलसी दास) आपने रामायण महाकाव्य का भी लेखन किया था

सुंदरकांड पढ़ते हुए 25 वें दोहे पर ध्यान थोड़ा रुक गया* । तुलसीदास ने सुन्दर कांड में, जब हनुमान जी