
[160]”श्रीचैतन्य–चरितावली”
।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामजगदानन्द जी की एकनिष्ठा अर्चायामेव हरये पूजां यः श्रद्धयेहते।न तद्भक्तेषु चान्येषु स भक्तः

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामजगदानन्द जी की एकनिष्ठा अर्चायामेव हरये पूजां यः श्रद्धयेहते।न तद्भक्तेषु चान्येषु स भक्तः

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामजगदानन्द जी के साथ प्रेम-कलह अनिर्दयोपभोगस्य रूपस्य मृदुनः कथम्।कठिनं खलु ते चेतः शिरीषसयेव

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामभक्त कालिदास पर प्रभु की परम कृपा नैषां मतिस्ताव्दुरुक्रमाङघ्रिंस्पृशत्य नर्थापगमो यदर्थ:महीयसां पादरजोअभिषेकंनिष्किंचनानां न

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम*महात्मा हरिदास जी का गोलोकगमन विनिश्चितं वदामि ते न चान्यथा वचंसि में।हरिं नरा

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामनिन्दक के प्रति भी सम्मान के भाव क्षमा शस्त्रं करे यस्य दुर्जनः किं

अभी-अभी मईया लाला को स्नान करवा के लाई है और लाला को पलंग पर बिठाकर उसके वस्त्र उठाने गई हैं।बस

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराममहाप्रभु की अलौकिक क्षमा क्षमा बलमशक्तानां शक्तानां भूषणं क्षमा।क्षमा वशीकृतिर्लो के क्षमया किं

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामपुरीदास या कवि कर्णपूर जयन्ति ते सुकृतिनो रससिद्धा: कवीश्वरा:।नास्ति तेषां यश:काये जरामरणजं भयम्॥

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामश्री शिवानन्द सेन की सहनशीलता न भवति भवति च न चिरंभवति चिरं चेत्

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामगोपीनाथ पट्टनायक सूली से बचे अकाम: सर्वकामो वा मोक्षकाम उदारधी:।तीव्रेण भक्ति योगेन यजेत