
[18]”श्रीचैतन्य–चरितावली”
।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम विश्वरूप का गृह-त्याग धन्याः खलु महात्मानो मुनयः सत्यसम्मताः। जितात्मानो महाभागा येषां न

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम विश्वरूप का गृह-त्याग धन्याः खलु महात्मानो मुनयः सत्यसम्मताः। जितात्मानो महाभागा येषां न

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम निमाई का अध्ययन के लिये आग्रह विद्यानाम नरस्य कीर्तिरतुला भाग्यक्षये चाश्रयो धेनुः

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम चंचल पण्डित सदयं हृदयं यस्य भाषितं सत्यभूषितम्। कायः परहितो यस्य कलिस्तस्य करोति

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम दिग्विजयी का वैराग्य भोगे रोगभयं कुले च्तुतिभयं वित्ते नृपालाद्भयं मौने दैन्यभयं बले

*।। श्रीहरि:।।* [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम *विश्वरूप का वैराग्य* को देशः कानि मित्राणि कः कालः कौ व्ययागमौ। कश्चाहं

। श्रीहरि:।।* [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम *अद्वैताचार्य और उनकी पाठशाला* गंगा पापं शशी तापं दैन्यं कल्पतरुस्तथा। पापं तापं

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम सर्वप्रिय निमाई यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः। हर्षामर्षभयोद्वेगैर्मुक्तो यः स च मे

*।। श्रीहरि:।।* [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम *चांचल्य* किं मिष्टं सुतवचनं मिष्टतरं किं तदेव सुतवचनम्। मिष्टान्मिष्टतमं किं श्रुतिपरिपक्वं सदेव

*।। श्रीहरि:।।* [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेराम *बाल-लीला* पंकाभिषिक्तसकलावयवं विलोक्य दामोदरं वदति कोपवशाद् यशोदा। त्वं सूकरोऽसि गतजन्मनि पूतनारे! इत्युक्तसस्मितमुखोऽवतु

।। श्रीहरि:।। [भज] निताई-गौर राधेश्याम [जप] हरेकृष्ण हरेरामश्रीविष्णुप्रिया-परिणय रूपसम्पन्नमग्राम्यं प्रेमप्रायं प्रियंवदम्।कुलीनमनुकूलं च कलत्रं कुत्र लभ्यते।। बहू के बिना घर सूना-ही-सूना