
जगन्नाथाष्टकं
जगन्नाथाष्टकं पुन्यं यः पठेत् प्रयतः शुचिः , सर्वपाप विशुद्धात्मा विष्णुलोकं स गच्छति , कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत तरलो, मुदाभीरी

जगन्नाथाष्टकं पुन्यं यः पठेत् प्रयतः शुचिः , सर्वपाप विशुद्धात्मा विष्णुलोकं स गच्छति , कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत तरलो, मुदाभीरी

सांवरिया तेरे लिए तेरे लिए मैंने जोगन वेस बनाया, जोगन वेस बनाया जोगन वेस बनाया , तोड़ लिया मैंने जग

हम तो दीवाने मुरलिया के, अजा अजा रे लाल यशोदा के तेरी बाट जोहे राधा गोरी, वो तो आई है

मोहन प्रेम बिना नही मिलता चाहे कर लो लाख उपाए मोहन प्रेम बिना नही मिलता मिले न यमुना सरस्वती में

बनवारी ओ कृष्ण मुरारी बता कुण मारी पूछे यशोदा मात रे, ओ लाला कहो थारे मनड़े री बात रे, भेजो

तू मेरा कान्हा मुरली वाला जग में तेरा नाम निराला, दुखियो का दुःख हरने वाला कहते कन्हियान तू रखवाला, तू

मुख नाल लाके मुरार वे जरा बंसरी सुना जा, बंसी सुना जा इक वार वे, बंसी तेरी ने दिल सडां

जग रूठे मेरा सांवरिया सरकार न रूठे, जीयु मैं जब तक श्याम तेरा दरबार न छुटे, एक तेरे भरोसे पर

मैं चिठिया लिख लिख हारी, कब आओगे बांके बिहारी नाथ कब आओगे, श्याम कब आओगे पहले जै श्री श्याम लिखा

सजने का है शौकीन कोई कसर न रह जाये, ऐसा करदो शृंगार सब देखते रह जाये, जब संवारा सजता है