
कन्हैय्या को एक रोज रो कर पुकारा
कन्हैय्या को एक रोज रो कर पुकारा, कहा उनसे जैसा हूँ अब हूँ तुम्हारा वोह बोले की किया क्या दुनिए

कन्हैय्या को एक रोज रो कर पुकारा, कहा उनसे जैसा हूँ अब हूँ तुम्हारा वोह बोले की किया क्या दुनिए

बरसाने मच गया शोर आज प्रगट भई राधा रानी, मेरा मन का नाचे मोर आज प्रगट भई राधा रानी, उची

की दम दा भरोसा यार दम आवे ना आवे, आ राधा नाम उचार हये…….. कर वृन्दावन नाल प्यार दम आवे

मेरे प्राणेश मन मोहन तुम्हे ढूँढू कहाँ जाकर, बड़ा बेचैन हूँ तुम बिन जरा देखो मुझे आकर, मेरे प्राणेश मनमोहन

कोई नही कोई नही कोई नही भगतो कोई नही , राधा रानी जैसी सुंदर कोई नही, राधे तेरे नाम का

राज पाठ और ठाट बाट के पीछे याद तड़पती है, राज पाठ के ठाट बाठ में गाइया याद आती है,

कन्हैया तोरी बंशी में सात छेद रे, सात छेद सात रस सातों भेद रे, कन्हैया तोरी बंशी में सात छेद

मेरो गोपाला नंद के लाला मनवा पिया रे तेरे नाम का प्याला बोलो जय श्री राधे कृष्णा बोलो जय श्री

काहे वन में खड़े मोहन जी यूँ बंसी बजाते हो के राधा को बुलाते हो या गोपियों को रिझाते हो

अगर ब्रज का बना दो मोर राधे ना चाहु कुछ और, मन में मेरे तड़प बड़ी है, चौकठ तेरी पे