
जितना राधा रोई-रोई कान्हा के लिए
जितना राधा रोई-रोई कान्हा के लिए, कन्हैया उतना रोया-रोया है सुदामा के लिए यार की हालत देखि,उसकी हालत पे रोया

जितना राधा रोई-रोई कान्हा के लिए, कन्हैया उतना रोया-रोया है सुदामा के लिए यार की हालत देखि,उसकी हालत पे रोया

नि मैं गोविन्द गोपाल गौन्दी फिरा, प्यारे मोहन नु रिजांदी फिरा तेरे उतो दिता है जहान सारा वार वे, प्रेम

श्याम अपने दीवाने पर एक कर्म कमा देना, जिस दिन मैं तुझे भूलू दुनिया से उठा लेना, जरा हु तेरी

तेरे एहसानो को कैसे मैं भुलाऊगा, जबतक साँस चले महिमा तेरी गाउ गा ना जाने कितने उपकार तेरे संकट से

खाटू जाकर देख ले झुकती दर पे दुनिया सारी, बिगड़ी हुई वाहा बनती मिट ती है हर लाचारी, अपने भगत

अब तुम बिनु कछु नाहीं भावत कान्हा, जिय गति जल बिनु मीन की नाईं, मोहें काहे नाहीं दरस दिखावत कान्हा,

मेनू बड़ा ही प्यारा लगदा नि माँ बंसरी वाला बंसरी वाला मुरली वाला बंसरी वाला मुरली वाला भगता दे मन

चरणों में जगह दे दो राधे हम पे किरपा करदो न वृद्धावन की ब्रिज की ब्रिज रानी, जहा वसे ठाकुर

मुझे प्राणों से प्यारा है कान्हा लोग मारे हैं मीठा मीठा ताना मैंने सखियों को बात बताई मेरी कान्हा से

कान्हा ने ऐसी है मुरली बजाई सुन ने को सारी ही गोपी है आई, तेरी मुरली बड़ी चित चोर रे,