
श्री गिरीराज अष्टकम
श्रीहरिदासवर्याष्टकम् श्रीमद् व्रजभूषमात्मज श्रीव्रजेश्वर कृतं, यतो हि सर्वे भवतापशान्तिं लभेयुरेतां व्रजराजदासाः, सदा कृपां यःकरणेसमर्थः भजाम्यहं तं हरिदासवर्यम् ॥ यदा व्रजेन्द्रेण

श्रीहरिदासवर्याष्टकम् श्रीमद् व्रजभूषमात्मज श्रीव्रजेश्वर कृतं, यतो हि सर्वे भवतापशान्तिं लभेयुरेतां व्रजराजदासाः, सदा कृपां यःकरणेसमर्थः भजाम्यहं तं हरिदासवर्यम् ॥ यदा व्रजेन्द्रेण

मेरी प्राथनाओ में कहो क्या कमी थी, प्रभु आते आते बहुत देर करदी, मेरी भावनाओ में कहो क्या कमी थी,

आंबे मैया दर तेरे आवा गे नच नच भंगडे पावा गे लावा गे जयकारे तेरे द्वार अमिए अज सहनु देदे

जब विपदा की बदरी थी छाई तूने मोरछड़ी अपनी लहराई हर मुसीबत से मुझको बचाया के श्याम तेरा शुक्राना तूने

पार करेंगे नैया भज कृष्ण कन्हैया निस दिन भज गोविन्द प्यारे, मोर मुकुट पीतांबर वारे । भगतो के रखवैया, भज

नी मैं रल भगता नाल गावा श्यामा जी तेरिया आरतिया हाथ मेरे में गंगा जल गड़वी मैं श्याम दे चरन

सुना है इन्कार करते नहीं किसी की भी निराश करते नहीं द्वार पे जो आये कोई झोली फैलाये कोई भरते

नौकरी करली है बरसाने दरबार, ऊचे महल अटारी वाली अलबेली सरकार, नौकरी करली है बरसाने दरबार, बिन तन खासे करू

कृष्ण कृष्ण बोल हरी हरी बोल अपनी वाणी में थोडा अमृत गोल कृष्ण कृष्ण बोल हरी हरी बोल जन्म मरण

परदा हमसें करते हो क्यों बिहारी जी, मुख अपना छिपाते बिहारी जी परदा हमसें करते हो क्यों बिहारी जी फूलों