
हरी नाम बिन कौन तरे
हरी नाम बिन कौन तरे आओ भजन दिन रेन करे, तूने जीवन खेल गवाया क्यों मन का ये खेल रच्या,

हरी नाम बिन कौन तरे आओ भजन दिन रेन करे, तूने जीवन खेल गवाया क्यों मन का ये खेल रच्या,

दर्शन दीजे नाम सनेही, तुम बिन दुःख पावे मेरी देही, अन्न ना भावे नींद न आवे, बार बार मोहे बिरहा सतावे, अन्न ना भावे नींद न आवे, बार बार मोहे बिरहा सतावे, दर्शन दीजे नाम सनेही, तुम बिन दुःख पावे मेरी देही, नैनन चलत सजल जलधारा, निश दिन पंथ निहारु तुम्हारा, नैनन चलत सजल जलधारा, निश दिन पंथ निहारु तुम्हारा, दर्शन दीजे नाम सनेही, तुम बिन दुःख पावे मेरी देही, गृह आंगन मोहे कछु न सहाई, बजर पई और फिरयो न जाई, गृह आंगन मोहे कछु न सहाई, बजर पई और फिरयो न जाई, दर्शन दीजे नाम सनेही, तुम बिन दुःख पावे मेरी देही,

सुनले तू ध्यान से होती यहाँ चौंकी माता आती है वही, स्वागत में माँ के तू ना रखना कमी, किसी

दुनिया के द्वारो से मैं ठोकर खा के श्याम धनि आई हु तेरे द्वार, मेरी सुनी हो गई मांग सो

कलगीधर दशमेश पिता जेहा, दुनिया ते कोई होया नही, चार पुत्र ओहने वतना तो वारे, एक वी लाल लकोया नही,

तेरे चरना दे विच माये रहना, माये नि मेरी बाह फड लै, चंगा लगदा नि रोज रोज केहना, माये नि

कितनी प्यारी छवि तुम्हारी कितना प्यारा नाम, इक तुहि मन मीत है मीरा तू ही है घनश्याम, जिस ने जब

आयो रंग रंगीला फागन मेला देखन जावन दे खेलन दे रंग श्याम के अंगना खेलन दे खेलन दे मने खेलन

सावरे मेरी भी तू लाज रख ले, खाटू धाम में अपने तू साथ रखले, लाज रख ले लाज रख ले…

गन्दला दा साग रोटी मक्की दी बनाई आ, खा लै ठाकरा वे ऐनी देर क्यों लगाई आ मखनी दा पेडा