
नैया है मझधार में श्याम
नैया है मझधार में श्याम इसे पार लगा जाऊ, हो नीले के असवार दयालु जल्दी आ जाऊ, आ जाऊ प्रभु

नैया है मझधार में श्याम इसे पार लगा जाऊ, हो नीले के असवार दयालु जल्दी आ जाऊ, आ जाऊ प्रभु

करदो री सखी मेरा शृंगार बनु मैं सजनी सँवारे की, अपने गहनों पर लिख वाउ श्याम नाम, करदो री सखी

साधो भाई सत्संग उत्तम गंगा, पाप ताप संताप मिटावे,झण्डा लहरावे तिरंगा, सत्संग तो संता की कोर्ट ,चले ज्ञान प्रसंगा, सतगुरु

तेरी आशिक़ी में जोगी बन कर दर दर के ठोकर खाता हु, बस एक नजर देख मुझे तुझे कब से

यो कुन सिंणगारयो यो कुन सिंणगारयो, सांवरिये ने बनड़ो बना दियो यो कुन सिंणगारयो, कठे से फूलडा ल्याया, ये कुन

तेरा रज रज करण दीदार आ गये, शेरा वाली माये तेरे द्वार आ गये, तेरे द्वार आ गये दरबार आ

निक्का जिहा मंदिर बनाके माँ मेरी बह गयी आसन लाके बह गयी आसन लाके माँ मेरी बह गयी आसन लाके

जब तक तू मेरा है खुशियों का सवेरा है, जीवन में अगर तू नहीं हर और अँधेरा है, क्या खोया

झांकी निराली है निराली मेरी मात की, दरबार ये प्यारा है,हये प्यारा शेरावाली का, सिर लाल चुनरिया माथे सूरज सी

किस्मत का मारा हु सँवारे प्यार की थोड़ी सी झलक दिखा मेरे श्याम, मेरी ज़िंदगी में श्याम धोखे ही धोखे