
कण कण मा बसे ओ दाई
काला काला सब कहते है, काला जगसे आला, काली पुतली काला सुरमा,आँख में बसने वाला, इक काले पे पर्तनी रखी,एक

काला काला सब कहते है, काला जगसे आला, काली पुतली काला सुरमा,आँख में बसने वाला, इक काले पे पर्तनी रखी,एक

श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊँ, चरणकमल धरिध्य़ान । श्री, शुभ, बल अरु शिल्पगुण, दीजै दया निधान ।। जय श्री विश्वकर्म भगवाना

कभी शिवजी के मंदिर गया ही नहीं, शिव भक्त कहाने से क्या फायदा, शिव का ध्यान कभी भी लगाया नहीं,

कर दो न इक बार ऐसी किरपा सरकार, सब छोड़ के जीवन में श्याम बस तेरा सुमिरन हो, दरबार में

कोई चिंता न जब म्हारे सिर पै श्याम धणो रो हाथ , दीं दुखी री बात विचारे बाबो दीना नाथ,

भक्तों में भक्त बड़े अंजनी माँ के लाला, भक्तों में भक्त बड़े मेरे बजरंग बाला, प्यारे है मेरे बाबा बड़े

अंजनी को लालो बड़ो प्यारो लागे, ये तो देव म्हणे सब से ही न्यारो लागे, केसरी नंदन जग वंदन भक्तो

तू मेरी माता बेटा मैं तेरा, तू ज्योति मैं अंधेरा, आ जाओ माँ अब न करियो देर ओ मेरी माँ

अस्सी काल भी आज भी कल भी तेरे दर ते आवा गे, कोई लोड पई ते मंगा गे नही ते

एक नजर तू देख ले मेरे श्याम तेरी किरपा से बनेगे बिगड़े काम एक नजर तू देख ले मेरे श्याम