
जबसे मिली है सांवरे तेरी ये नौकरी
जबसे मिली है सांवरे तेरी ये नौकरी आदत सी बन गयी मेरी तेरी ये चाकरी जबसे मिली है………… हर सुबह

जबसे मिली है सांवरे तेरी ये नौकरी आदत सी बन गयी मेरी तेरी ये चाकरी जबसे मिली है………… हर सुबह

शिव शंकर तुम्हरी जटाओ से गंगा की धारा बहती है, सारी श्रिस्टी इस लिए तुम्हे गंगा धारी शिव कहती है,

नी लोक्की मैनू पुछदे ने हारां वाले की लगदे तेरे सतगुरु मेरे नैना दी ज्योति सईओ नी ए सुच्चे मोती

भूल के वी तेनु कदे दिलो न बुलावा, तू माफ़ करी मेरिया खतावा तू ते मेनू छड़ना नि मैं छड

जो तुम तोड़ो पिया, मैं नाही तोडू रे। तोरी प्रीत तोड़ी कृष्णा, कौन संग जोडू॥ तुम भये तरुवर, मैं भयी

साई राम साई राम साई राम जी, साई राम साई राम दाता है तू गरीबो का, तू ही मालिक है

तर्ज – हमदम मेरे मान भी जाओ…. बड़ा ही पावन , है मन भावन श्रावण का सोमवार है, कालो के

जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी शुंभ विदारिणी, माता भवानी जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी

तू आजा कहा है मेरे श्याम प्यारे, कोई गम का मारा,॥ तुज्को पुकारे, तू आजा कहा है मेरे श्याम प्यारे,

डम डम डमरू भाजे शंकर जी कैलाश विराजे, संग में अम्ब भवानी नाचे, ॐ नमः शिवाये, बड़े भोले है अपने