
मन मस्त हुआ फिर
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले, क्या बोले फिर क्योँ बोले, हीरा पाया बांध गठरिया, हे बार बार वाको क्यों

मन मस्त हुआ फिर क्या बोले, क्या बोले फिर क्योँ बोले, हीरा पाया बांध गठरिया, हे बार बार वाको क्यों

ओ सांवरिया ले ले मोल,तने सेवक नित उठ चाहे, तने सेवक नित उठ चाहे….. ये दुनिया का नर नारी,सब आया

काशी पति सदाशिव कैलाश के बसैया, ओ विश्वनाथ बाबा तुम तो तन में भसम रमैया, गल कालिया विराजे नर मुंडनों

ओ भोले भंडारी हमारे घर आ जइयो, अखियाँ तरसे हमारी के दर्श दिखा जियो, बहुत दिनों से आस लगाईं पर

ओ सुन अंजनी के लाला, मुझे तेरा एक सहारा, मुझे अपनी शरण में ले लो, मैं बालक हूँ दुखियारा, माथे

भोले भोले रट ले जोगनी शिव ही बेडा पार करे, भोले नाथ बिन न मुकति मिले, भोले भोले रट ले

चढ़ गई चढ़ गई माँ मस्ती तेरे नाम की अब तो सारी दुनिया माँ लगती नहीं किसी काम की, चढ़

दया करो हे नाथ जगत पे कैसी विपता आई, सारी दुनिया तर्स्त है जिस से जनता है गबराई, जगत के

बालपना में रामदेवजी हटकिलो अतीबारी, कैइसो हटकिलो रे बालक सोच रही माँ कारी, की कर मैं इने समझाउ आगी रे

खुशिया मनाओ मंगल गाओ स्वागत में तुम फूल बिछाओ, श्याम आ गया रे मेरा श्याम आ गया , गंगा जल