
भगवान राम ने चारों भाईयों और माता जानकी के सहीत श्री रामप्रसाद जी को दर्शन दिए
श्री अयोध्या जी में ‘कनक भवन’ एवं ‘हनुमानगढ़ी’ के बीच में एक आश्रम है जिसे ‘बड़ी जगह’ अथवा ‘दशरथ महल’

श्री अयोध्या जी में ‘कनक भवन’ एवं ‘हनुमानगढ़ी’ के बीच में एक आश्रम है जिसे ‘बड़ी जगह’ अथवा ‘दशरथ महल’

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ऊं जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।मांग सिन्दूर

ओम जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा । ॐ जय शिव ओंकारा ॥

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्टदलन रघुनाथ कला की ॥ जाकें डर से गिरिवर काँपे । रोग दोष जाके निकट

सीया-रघुवर जी की आरती, शुभ आरती कीजिये -२सीस मुकुट काने कुण्डल शोभे -२राम लखन सीय जानकी, शुभ आरती कीजियेसीया-रघुवर जी

हे प्रभु प्राण नाथ हे परमात्मा मै तुम्हारे ह्दय के अन्दर में बैठ जाऊगी ।हे परमात्मा मैने तो अपना दिल

जय जय तुलसी मातासब जग की सुख दाता, वर दाताजय जय तुलसी माता सब योगो के ऊपर, सब रोगों

जिसे झुककर नमन करके चलना आ गया वही आत्म समर्पण कर सकता है। जो भगवान को भजते भजते गोण हुआ

ये प्रेम जीवन भर हंसाता है जीवन भर रूलाता है। प्रभु प्रेमी अपने प्रभु के चरणों में समर्पित हो जाता

मेरे प्रभु कब तुम मेरे सामने होंगे ।मै अपने आप को भुल जाऊंगी। शरीर शिथिल पङ जाएगा ।मै तुम्हारे चरणों