
भगवान राम की देवताओं द्वारा स्तुति
दोहा-बरषहिं सुमन हरषि सुर बाजहिं गगन निसान।गावहिं किंनर सुरबधू नाचहिं चढ़ीं बिमान।। भावार्थ-देवता हर्षित होकर फूल बरसाने लगे।आकाश में डंके

दोहा-बरषहिं सुमन हरषि सुर बाजहिं गगन निसान।गावहिं किंनर सुरबधू नाचहिं चढ़ीं बिमान।। भावार्थ-देवता हर्षित होकर फूल बरसाने लगे।आकाश में डंके

।। कलियुग की व्याख्या ।।(श्रीरामचरितमानस से) कृतजुग त्रेताँ द्वापर पूजा मख अरु जोग।जो गति होइ सो कलि हरि नाम ते

अपना जीवन दूसरों के हित के लिये होइसलिये क्या करना चाहिये ? बस भगवान् का भजन करना चाहिऐ…|राम नाम रटते

श्रीआनंदी बाई जीश्रीआनंदी बाई जी का मंदिर अठखम्भा पुराने शहर में श्री राधावल्लभ जी के घेरा पुराने मंदिर की दायी

एक बार की बात है। एक संत अपने एक शिष्य के साथ किसी नगर की ओर जा रहे थे। रास्ते

।। भगवती स्तोत्रम् ।। महर्षि व्यास द्वारा लिखा गया मां दुर्गा का यह स्तोत्र कल्याणकारी है। इसका पाठ करने से

महर्षि वेदव्यासकृत ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणपति खण्ड में श्री गणेश जी के अद्भुत चरित्र का वर्णन है।(उस अद्भुत चरित्र के

माँगी नाव ना केवट आना।कहइ तुम्हार मरम मैं जाना।। चरन-कमल रज कहुँ सबु कहई।मानुष करनि मुरि कछु अहई।। इस चौपाई

वैसे तो हनुमानजी के बहुत सारे मंत्र हैं, जैसे ॐ हनुमंते नम: या ‘ॐ हं हनुमते नम: मंत्र को सभी

एक राजा को अपने लिए सेवक की आवश्यकता थी। उसके मंत्री ने दो दिनों के बाद एक योग्य व्यक्ति को