हरि को भजे सो हरि कै होई
भक्ति कथा गुरु रविदास की महिमा सुनकर और पवित्र जीवन को देखकर बहुत से राजा-रानी उनके शिष्य बन गए थे।
भक्ति कथा गुरु रविदास की महिमा सुनकर और पवित्र जीवन को देखकर बहुत से राजा-रानी उनके शिष्य बन गए थे।

हम केवल निमित्त मात्र है इससे ज्यादा और कुछ नही…..बहुत ही ज्ञानवर्धक कथा जरूर पढे! कोई भी छोटा-बड़ा काम करो

वाराणसी के एक साधक थे सुदर्शन जी ब्रह्ममुहूर्त का समय था । वे गंगा जी में कमर तक डूबे जप

(हिन्दी अर्थ सहित) अयि गिरि-नन्दिनि नंदित-मेदिनि विश्व-विनोदिनि नंदनुतेगिरिवर विंध्य शिरोधि-निवासिनि विष्णु-विलासिनि जिष्णुनुते।भगवति हे शितिकण्ठ-कुटुंबिनि भूरि कुटुंबिनि भूरि कृतेजय जय हे

एक महान विद्वान से मिलने के लिये एक दिन रोशनपुर के राजा आये। राजा ने विद्वान से पुछा, ‘क्या इस

श्री राम जय राम जय जय राम- यह सात शब्दों वाला तारक मंत्र है। साधारण से दिखने वाले इस मंत्र

जय श्री राधे कृष्णप्रार्थना व शुद्ध क्षण है जब आपका और ईश्वर का मिलन होता है, वहां छोटी-छोटी मांगे बीच

अति प्राचीन काल की बात है। द्रविड़ देश में एक पाण्ड्यवंशी राजा राज्य करते थे। उनका नाम था इंद्रद्युम्न। वे
राम से बड़ा राम का नाम: राम नाम का इन दो अक्षर में ही पूरी रामायण है और पूरा शास्त्र

।। । भगवान् ने गीतामें कहा है‒ ‘ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः’ (गीता १५ / ७) । ‘इस संसार में जीव