
मन चंगा तो कठौती में गंगा
एक बार की बात है, एक परिवार में पति पत्नी एवं बहू बेटा याने चार प्राणी रहते थे। समय आराम

एक बार की बात है, एक परिवार में पति पत्नी एवं बहू बेटा याने चार प्राणी रहते थे। समय आराम

जय भगवान राम रामकथा ससि किरन समाना।संत चकोर करहिं जेहि पाना।। ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी।महादेव तब कहा बखानी।। भावार्थ:-श्री रामजी

एकनाथ जी महाराज ने ‘कैवल्य मुक्ति किसे कहते हैं’.. इसे समझाने के लिए अपनी रामायण में एक बहुत सुंदर कथा

नम: पुरुषोत्तमाख्याय नमस्ते विश्वभावन।नमस्तेस्तु हृषिकेश महापुरुषपूर्वज।।१।। येनेदमखिलं जातं यत्र सर्व प्रतिष्ठितम।लयमेष्यति यत्रैतत तं प्रपन्नोस्मि केशवं।।२।। परेश: परमानंद: परात्परतर: प्रभु:।चिद्रूपश्चित्परिज्ञेयो स

कृष्णनगर के पास एक गांव में एक ब्राह्मण रहते थे। वे ब्राह्मण पुरोहिती का काम करते थे।.एक दिन यज़मान के

Gajendra Moksham Stotramश्री शुक उवाच -एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो हृदि ।जजाप परमं जाप्यं प्राग्जन्मन्यनुशिक्षितम ॥१॥ गजेन्द्र उवाच -ऊं नमो भगवते तस्मै

ब्रह्म राम तें नामु बड़ बर दायक बर दानि।रामचरित सत कोटि महँ लिय महेस जियँ जानि।। भावार्थ-इस प्रकार ‘राम’ नाम

।। श्रीरामचरितमानस- अयोध्याकाण्ड ।। चौपाई-नयनवंत रघुबरहि बिलोकी।पाइ जनम फल होहिं बिसोकी।। परसि चरन रज अचर सुखारी।भए परम पद के अधिकारी।।

श्रीरामचरितमानस- अयोध्याकाण्ड चौपाई-राम संग सिय रहति सुखारी।पुर परिजन गृह सुरति बिसारी।। छिनु छिनु पिय बिधु बदनु निहारी।प्रमुदित मनहुँ चकोर कुमारी।।

एक बार किसी गांव में एक सन्त आये और झोपड़ी बना कर रहने लगे। लोगों से उनका बहुत मतलब नहीं