
जय श्री हरि
त्वमेव माता च पिता त्वमेव,त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।त्वमेव विद्या च द्रविणं त्वमेव,त्वमेव सर्वम् मम देवदेवं।। भावार्थ- ‘हे भगवान! तुम्हीं माता

त्वमेव माता च पिता त्वमेव,त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।त्वमेव विद्या च द्रविणं त्वमेव,त्वमेव सर्वम् मम देवदेवं।। भावार्थ- ‘हे भगवान! तुम्हीं माता

“एक भोगी राजा की दासी दीवान खंड की सफाई करते करते पलंग की सुंदरता देख दो मिनट के लिये बैठी

सम्राट विक्रमादित्य एक महान व्यक्तित्व और शक्ति का प्रतीक थे लेकिन, आज उनसे जूड़े सबूतों की अनुपस्थिति का मतलब यह

एक समय की बात है एक भाई बहन रहते थे। बहन का नियम था कि वह अपने भाई का चेहरा

यह सृष्टि चौरासी लाख योनियों का वन है, जिसमें विधाता ने हमें रखा है, जो प्रभु नाम रूपी आश्रय को

मानस -चिंतन जब सभी देवता यहाँ तक स्वयं ब्रह्मा और विष्णु जी असमंजस में थे कि वो परब्रह्म परमात्मा मिलेगा

रूद्ररूप में भगवान शिव के साथ संरेखित करने के लिए रुद्र गायत्री मंत्र का अभ्यास किया जाता है। रूद्र मंत्र

जीरो(0) की खोज और पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है….सर्वप्रथम इस सिद्धांत का प्रतिपादन करने वाले समृद्ध भारत के प्राचीन

ये सम्पूर्ण गीता का सार है जिसमें भगवान कृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि तु मेरा स्मरण चिन्तन करते हुए

अक्सर कुछ लोग सोचते है कि सतगुरु से ज्ञान अर्थात नामदान लिये कई वर्ष हो गए थोड़ा बहुत भजन सिमरन