
भगवद गीता में कर्म फल
आज का प्रभु संकीर्तन।जीवन में सदेव कर्म करते रहना चाहिए। क्योंकि भगवद गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है

आज का प्रभु संकीर्तन।जीवन में सदेव कर्म करते रहना चाहिए। क्योंकि भगवद गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है

🌟🔱 पर्व मंथन🔱🌟 आज श्रीमद्भागवत गीता प्राकट्योत्सव है। हिन्दू धर्म के सबसे श्रेष्ठ ग्रन्थ का जन्मोत्सव आज के दिन मनाया

१) रानी कौसल्या ने श्री राम जी को चैत्र शुक्ल नवमी के दिन, पुनर्वसु नक्षत्र में ‘कर्क लग्न’ में बृहस्पति

राधानामपरमसुखदाई मुनीन्दवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणी,प्रसन्नवक्त्रपंकजे निकंजभूविलासिनी।व्रजेन्दभानुनन्दिनी व्रजेन्द सूनुसंगते,कदा करिष्यसीह मां कृपा-कटाक्ष-भाजनम्॥ (१) समस्त मुनिगण आपके चरणों की वंदना करते हैं, आप तीनों

*1- बालि का भाई सुग्रीव…2-रावण का भाई विभीषण…3- राम का भाई भरत.. ये जीव की तीन दशाओं की तरह भी

आज मैने मेरे स्वामी भगवान् नाथ श्री हरि से जिन्हें मैं हर क्षण हदय में बिठाकर नैनो को बन्द कर

भगवान विष्णु के छठवे अवतार श्री दत्तात्रेय जी की जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा) के अवसर परभगवान विष्णु के छठवे अवतार

हम पुरा जीवन किसी न किसी को पकड़ कर रखते और सोचते हैं अमुक सम्बन्ध अमुक रिस्तेदार हमें बहुत सुख

सूर्य आदि सात ग्रहों के नाम पर सप्ताह के सात दिन तय किए गए हैं। हर वार का अधिपति कोई

प्रणामप्रणाम में बड़ी ताकत होती है।पहले लोग सुबह सुबह उठ कर घर के बड़े-बुजुर्गों को झुक कर प्रणाम करते थे,