
नित्य तुम्हारा ही गुणगान करू
हे श्री राधे ! मैं आपसे ब्रह्मलोक पर्यन्त के नाशवान सुख एवं पाँचों प्रकार की मुक्तियों की कामना नहीं करता।

हे श्री राधे ! मैं आपसे ब्रह्मलोक पर्यन्त के नाशवान सुख एवं पाँचों प्रकार की मुक्तियों की कामना नहीं करता।

हे मेरे प्रभु ! बहुत युग बीते, कब लोगे खबर? कब सुनोगे पुकार? कब कैसे मिलेगा तुम्हारा प्यार? मेरे जीवन

भक्त मन को, दिल को, नैनो को, राम नाम अमृत का रसपान कराना चाहता है । आत्मा कहती हैं, कि

एक भक्त अंतर्मन से भाव में है अन्तर्मन से भगवान का सतसंग चल रहा है भक्त भाव मे गहरा चला

भगवान शिव से कुछ भी छुपा हुआ नही है, वो सब देख रहे है, उनके चार मुख चारो दिशाओ में

हे नाथ ! चाहे मेरे दुख दूर मत करो , पर उनको सहने की शक्ति जरूर दो । ताकि मैं

मङ्गलमयी शिव स्तुति प्रतिदिन सुबह शिवलिंग पर जल, दूध अथवा पंचामृतस्नान के बाद फूल और श्रीफल अर्पित करें, तत्पश्चात शाम

अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट रघु ने ही ‘रघुकुल’ या ‘रघुवंश’ की नींव रखी थी। रघुकुल अपने सत्य, तप, मर्यादा, वचन

एक भक्त भगवान से अन्तर्मन से प्रार्थना करते हुए कहता है कि हे परमात्मा मेरे सब कुछ आप ही है आप

जय श्री राधे कृष्णप्रार्थना व शुद्ध क्षण है जब आपका और ईश्वर का मिलन होता है, वहां छोटी-छोटी मांगे बीच