
ब्राह्मणीके द्वारा जीवरक्षा
भावनगर राज्यके खेडियार माताके मन्दिरमें चण्डी पाठका अनुष्ठान चल रहा था। इसी बीचमें एक दिन चैत्र कृष्ण पञ्चमीको महाराज श्रीभावसिंहजी

भावनगर राज्यके खेडियार माताके मन्दिरमें चण्डी पाठका अनुष्ठान चल रहा था। इसी बीचमें एक दिन चैत्र कृष्ण पञ्चमीको महाराज श्रीभावसिंहजी

सतीशिरोमणि राजमती – जिसका घरेलू प्यारका नाम राजुल था, यादववंशकी एक उज्ज्वल कन्या – रत्न थी । यदुकुलभूषण समुद्रविजयके तेजस्वी

शेषावतार श्रीरामानुज महामुनीन्द्रके पवित्र सम्प्रदायमें श्रीवैष्णव-जगत्के महान् आचार्य श्रीवेङ्कटनाथका प्राकट्य विक्रम संवत् 1325 में विजयादशमीके दिन हुआ था। ये बहुत

वनमें धर्मराज युधिष्ठिरके चारों भाई सरोवरके किनारे मृतकके समान पड़े थे। प्यास तथा भ्रातृशोकसे व्याकुल युधिष्ठिरके सम्मुख एक यक्ष प्रत्यक्ष

एक व्यापारीको व्यापारमें घाटा लगा। इतना बड़ा घाटा लगा था कि उसकी सब सम्पत्ति लेनदारोंका रुपया चुकानेमें समाप्त हो गयी।

वृन्दावनमें सेवाकुञ्ज नामक एक स्थान है। यह प्रचलित है कि रातको वहाँ दिव्य रास होता है। इसीलिये रातको वहाँ कोई

विनोबाका ‘एम टू ए’ सन्त विनोबा भावेने समाजको कई अभिनव सूत्र दिये, जिससे व्यक्ति आत्मोन्नत होकर समाजका नवनिर्माण कर सके।

सत्तूका चमत्कार कहा जाता है, पलामूके शासक भगवन्तराय काफी कुशाग्रबुद्धि तथा विनोदी स्वभावके थे। बात है, सन् 1618ई0 के आस-पासकी।

अमेरिका संयुक्तराज्यके एक प्रेसीडेंट एक बार राजसभामें जा रहे थे। रास्तेमें उन्होंने एक सूअरको कीचड़ में धँसे देखा । सूअर

पूर्वकालमें एक सहस्रपाद नामके ऋषिकुमार थे। उनमें सभी गुण थे केवल एक दुर्गुण था कि वे अपने मित्रों और साथियोंको