
अपनेको पहचानना सहज नहीं
“क्यों री ! आज सागमें नमक डालना भूल | गयी?’- पैठनके परम कर्मठ षट्शास्त्री बहिरंभट्टने अपनी पत्नीसे पूछा । पत्नीने

“क्यों री ! आज सागमें नमक डालना भूल | गयी?’- पैठनके परम कर्मठ षट्शास्त्री बहिरंभट्टने अपनी पत्नीसे पूछा । पत्नीने

बहुत पहले अयोध्यामें एक राजा रहते थे ऋतध्वज महाराज रुक्माङ्गद इनके ही पुत्र थे। ये बड़े प्रतापी और धर्मात्मा थे।

जीवनका कम्बल दो साधु थे। किसी भक्तने दोनोंको बहुमूल्य गर्म कम्बल उपहारमें दिये दिनभर यात्रा करनेके बाद दोनों साधु रातके

जर्मनीकी सेनाके कोई उच्चाधिकारी किसी युद्धके समय अपने शिविरसे कुछ सैनिकोंके साथ घोड़ोंके लिये घास एकत्र करने निकले। समीपमें एक

कमलका पुत्र उपकोसल सत्यकाम जाबालके यहाँ ब्रह्मचर्य ग्रहण करके अध्ययन करता था। बारह वर्षोंतक उसने आचार्य एवं अग्रियोंकी उपासना की।

ब्रिटेनमें तब जेम्स द्वितीयका शासन था। वह अपने अत्याचार एवं अन्यायके लिये काफी बदनाम रहा है। उसके समयमें जिसे फाँसीकी

शास्त्रीजीका कोट बात उन दिनोंकी है, जब लालबहादुर शास्त्री केन्द्रीय मन्त्री थे। सादगी और ईमानदारीमें शास्त्रीजी बेजोड़ थे। एक बारकी

दान और भोग राजा भोज जंगलके रास्तेसे जा रहे थे साथमें था राजकवि पण्डित धनपाल। भोजने जंगलमें एक बड़े वृक्षकी

एक बार एक बुद्धिमान् ब्राह्मण एक निर्जन वनमें घूम रहा था। उसी समय एक राक्षसने उसे खानेकी इच्छासे पकड़ लिया।

आर्ष-साहित्यकी बोधकथाएँ ऋग्वेदकी मार्मिक बोधकथाएँ [ऋग्वेद विश्वसाहित्यका सबसे श्रेष्ठ तथा प्राचीनतम ग्रन्थ है। यह भारतीय सनातन संस्कृति तथा परम्पराका मूलस्रोत